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Rampur Bushahar News: नेरवा में मां, तीन बच्चों और राजगढ़ में पति-पत्नी का एक साथ अंतिम संस्कार

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तलांगना अग्निकांड : लोकेंद्र ने सरिये से खिड़की को तोड़ बचाई थी अपनी जान
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संवाद न्यूज एजेंसी

नेरवा (रोहड़ू)। सिरमौर के तलांगना गांव में अग्निकांड में जिंदा जले नेरवा के मां और तीन बच्चों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। वहीं, सिरमाैर जिले के राजगढ़ में अग्निकांड में जिंदा जले पति-पत्नी का भी एक साथ एक चिता पर अंतिम संस्कार

किया गया।

14 जनवरी की रात चौपाल उपमंडल के बिज्जर गांव के निवासी ठाकुर जोगेंद्र सिंह के परिवार पर कहर बनकर टूटी। तलांगना गांव में हुए भीषण अग्निकांड में ठाकुर जोगेंद्र सिंह ने बहू कविता, पोते कृतिक समेत दो पोतियों कृतिका और सारिका को खो दिया। बेटा लोकेंद्र सिंह भी बुरी तरह से झुलस गया।
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बिज्जर गांव में हादसे के बाद मातम का माहौल है। अवशेषों का डीएनए टेस्ट करवा मृतकों के परिजनों को सौंपा गया। बिज्जर गांव के कुछ लोग इन अवशेषों को लेने के लिए तलांगना गए और बीती रात गांव पहुंचे। शुक्रवार सुबह इन अवशेषों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान हर व्यक्ति की आंख नम थी। लोकेंद्र के भाई यशवंत, भतीजे बनी और अक्षय ने मुखाग्नि दी।

लोकेंद्र के चाचा अमर सिंह ठाकुर ने बताया कि लोकेंद्र अपनी पत्नी और बच्चों के साथ माघी का त्योहार मनाने के लिए ससुराल घंडोरी गया था। उसकी सास इंद्रा देवी पास के गांव तलांगना में स्थित अपनी दोघरी में रह रही थी। सास ने बेटी दामाद को अपने पास मेहमानवाजी में बुलाया था। यह लोग बुधवार को ही तलांगना पंहुचे थे। लोकेंद्र की पत्नी, तीन बच्चे, साढू नरेश और साली तृप्ता एक कमरे में सो रहे थे।

जब आग लगी तो साथ के कमरे में सो रहे लोकेंद्र सिंह ने लोहे के सरिये से जलते हुए मकान की खिड़की तोड़कर किसी तरह जान बचाई, जबकि दूसरे कमरे में सोए छह लोग अग्निकांड में जिंदा जल गए। मलबे में दबे जिंदा जले लोगों के अवशेषों को जेसीबी मशीन की सहायता से निकाला गया।मेहमान बनकर गए थे पति-पत्नी लाैटे अवशेष
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राजगढ़ (सिरमौर)। राजगढ़ की नौहराधार तहसील के तलांगना में हुए भीषण अग्निकांड में जिंदा जलने वाले राजगढ़ के टपरोली निवासी पति-पत्नी का अंतिम संस्कार वीरवार देर रात को एक ही चिता पर किया गया। इस घटना से समूचे पझौता, रासुमांदर और राजगढ़ क्षेत्र में शोक व्याप्त है। टपरोली निवासी नरेश ठाकुर और उनकी पत्नी तृप्ता ठाकुर तलांगना मेहमान बनकर गए थे और बुधवार रात को मकान में आग लगने से वह जिंदा ही जल गए। वीरवार को उनके जले हुए शव के अवशेष ही परिजन अपने पैतृक गांव टपरोली लाए और उन्हें सीधे श्मशानघाट ले जाया गया, जहां वीरवार देर रात ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। शुक्रवार को भी उनके घर में अफसोस करने वालों का तांता लगा रहा। अग्निकांड में पति-पत्नी के एक साथ जल जाने की इस घटना ने समूचे क्षेत्र को सकते में डाल दिया है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि ईश्वर ने क्या मौत इस दंपती को दी कि उनके परिजनों को पूरे शव तक अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं मिल पाए। संवाद

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