जुब्बल के धानसर गांव के नरखाल में सोमवार सुबह हुई बारिश का पानी लोगों के घरों और गोशाला में भर गया। लगातार सड़क से बह रहे बरसात के पानी से एक गोशाला के पीछे भू-स्खलन हो गया और पानी अंदर भर गया। इसके बाद लोग घर और गोशाला को बचाने के लिए कुदाल लेकर पानी का बहाव बदलते रहे। करीब दो घंटे हुई बारिश से ही हालात बदतर हो गए हैं।
खरशाल-धानसार सड़क में जगह-जगह पानी रुकता है, लेकिन निकासी की उचित व्यवस्था न होने से पानी घरों, गोशाला और खेतों में आ जाता है। इसका कारण यह है कि सड़क का ग्रेड नाले के बजाय घरों के ऊपर छोड़ा गया है, जिससे सारा पानी घरों, गोशाला और खेतों को नुकसान पहुंचाता है। हर साल बरसात के दिनों में लोग सड़क का पानी नाले की तरफ मोड़ने के लिए नालियों को काटते हैं, लेकिन ग्रेड विपरीत दिशा में होने के कारण पानी नाले के बजाय खेतों में जाता है। स्थानीय लोग कई बार प्रशासन से ग्रेड को नाले की तरफ छोड़ने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आश्वासन ही मिले। ग्रामीण जोधराम ने बताया कि वह बीते चार साल मुख्यमंत्री सेवा संकल्प के जरिये बरसात के पानी से बचाव की मांग कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी टाल-मटोल करके शिकायत को बंद कर देते हैं। बीते साल सड़क के पानी से भू-स्खलन हो गया, जिससे शेड में रखीं सेब की पेटियां दब गईं।
सड़क बनने के बाद से ही नरखाल के लोग बरसात के समय हर साल डर के साय में जी रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द सड़क के ग्रेड को नाले की तरफ छोड़ा जाए और वैज्ञानिक तरीके से नालियां भी कटी जाएं, ताकि बरसात के पानी से घरों और खेतों को नुकसान न हो।
आधी रात कुदाल लेकर घरों को बचाते रहे लोग
बीते साल आई बरसात में नरखाल खड्ड का बहाव बढ़ गया। इससे सारा पानी कलवर्ट के ऊपर से घरों की तरफ आ गया। लोग आधी रात को कुदाल, झबल और गैंती लेकर खड्ड के बहाव को घरों की ओर आने से रोकते रहे। 2019 में इसी खड्ड ने भारी तबाही मचाई थी, जिससे स्थानीय लोगों के कई खेत और 200 सेब के पौधे बह गए। स्थानीय जोधराम, जयपाल, बिट्टू और विनोद ने बताया कि उस वक्त भी प्रशासन ने उनकी कोई मदद नहीं की। हमेशा डर लगा रहता कि दोबारा ऐसा मंजर न देखना पड़े।
सड़क में नालियां खोदने के दिए निर्देश
गोशाला में सड़क का पानी भरने कि सूचना मिली है। इसके बाद तुरंत मौके पर दौरा किया। अधिकारियों को सड़क में नालियां खोदने के निर्देश दे दिए हैं, ताकि स्थानीय घरों को नुकसान न हो।
-तरसैम सिंह बाउटा, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी हाटकोटी