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Rampur Bushahar News: सेब के बगीचों में कम उंचाई पर निकलने शुरू हुए सिलवर टिप्स, विशेषज्ञ की सलाह कम व अधिक खाद की मात्रा पौधे को नुकसानदायक

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कम उंचाई के बगीचों में गर्मी बढने के साथ निकलने शुरू हुए सिल्वर व ग्रीन  टिपस
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहड़ू। बर्फबारी और बारिश कम होने के बाद तापमान में बढ़ोतरी होने से कम ऊंचाई वाले सेब के बगीचों में इस साल समय से पहले सिल्वर टिप्स निकलने शुरू हो गए हैं। बागवानों ने जमीन में कम नमी होने के बाद भी अब वक्त कम बचने पर खाद डालने का काम शुरू कर दिया है। अधिकांश बागवान मिट्टी की जांच के बिना उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञ सूखे में रासायनिक खादों का कम और अधिक प्रयोग पौधे के लिए नुकसानदायक मान रहे हैं। अच्छी पैदावार के लिए सेब के बगीचों में फरवरी महीने के अंत तक खाद मिलाने काम पूरा किया जाता है। जमीन में नमी होने के बाद ही बागवानों ने तौलिये बनाने के साथ खाद मिलने का काम निचले क्षेत्रों में शुरू कर दिया है। बागवान समय निकलने के साथ बगीचे में रखरखाव का काम समय पर निपटाने की कोशिश में है। लोग शीघ्र परिणाम के लिए जैविक खादों को रासायनिक खादों की तुलना बेहतर मानते हैं। अधिकांश बागवान अपने पुराने अनुभव से उर्वरकों का प्रयोग करते आ रहे हैं, जबकि आधुनिक खेती के लिए बागवानी विशेषज्ञ गलत उर्वरकों का प्रयोग पौधे के लिए नुकसानदायक मानते हैं।
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बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि अधिकांश बागवान मिट्टी की जांच के बिना खादों का प्रयोग करें। पौषक तत्व का संतुलन बनाए रखने के लिए पौधों में आवश्यकता के अनुसार खादों के प्रयोग होना जरूरी है। अधिक या कम खादों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता खत्म हो जाती है। पौधों में भी पोषक तत्व का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। बागवानों को सलाह दी है कि मिट्टी परीक्षण के बाद ही आवश्यकता के अनुसार बगीचों में खादों का प्रयोग करें। इसके लिए जिला कृषि विज्ञान केंद्र, बागवानी विभाग के मृदा परीक्षण केंद्रों में प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। मृदा परीक्षण के लिए बगीचों से मिट्टी के नमूने लेने के लिए भी विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत रहती है।
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