भद्राश में परियोजना प्रभावितों के सम्मेलन में कई ज्वलंत मुद्दे गरमाए, सरकार की लापरवाही पर जताई चिंता
केंद्र की जन विरोधी नीतियों के चलते देश में व्यापक कृषि संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। परियोजना के निर्माण कार्य से लोगों की फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है तो वहीं घरों में दरारें भी आ गई है। यह मुद्दा बुधवार को भद्राश में आयोजित हिमाचल किसान सभा लुहरी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट 210 मेगावाट प्रभावित पंचायतों के पहले उठा। सम्मेलन में . ओंकार शाद ने कहा कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण देश में व्यापक कृषि संकट, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और खाद्य असुरक्षा पैदा हुई है। सम्मेलन का शुभांरभ डॉ. ओंकार शाद और समापन राकेश सिंघा ने किया। शाद ने कहा कि देश और प्रदेश में सरकार की ओर से जो नीतियां लागू की जा रही हैं, उन नीतियों से किसानों, मजदूरों और मेहनतकश लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गरीबों के संसाधनों को छीनकर अमीरों के हवाले किया जा रहा है। बीते 10 सालों में मोदी सरकार ने पूंजीपतियों का 15 लाख करोड़ का कर्जा माफ किया और किसानों का कुल कर्जा जो 18 लाख करोड़ है, उसका एक रुपया भी माफ नहीं किया। राकेश सिंघा ने कहा कि लुहरी परियोजना निर्माण में जिन परिवारों की जमीन लगी है, उन परिवारों को जमीन के दाम के साथ, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार नहीं दिया गया है। भूमि अधिग्रहण में भी शिमला और कुल्लू जिले में अलग-अलग जमीन के दाम तय किए गए हैं। कुल्लू जिले में 32 लाख, 65 हजार रुपये प्रति बीघा, शिमला जिले के नीरथ में 50 लाख रुपये प्रति बीघा, भद्राश में 40 लाख रुपये प्रति बीघा और नौला में 20 लाख रुपये प्रति बीघा दाम लोगों को मिले हैं। वहीं परियोजना के निर्माण से उठ रही धूल से प्रभावित पंचायतों के किसानों की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। ब्लास्टिंग से किसानों के घरों में दरारें आ गई हैं और पीने के पानी के स्रोत सूख रहे हैं। अभी तक किसानों को फसलों के नुकसान और दरारों का मुआवजा नहीं दिया है। इस मौके पर हिमाचल किसान सभा राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तनवर, अमित, तुला राम, राहुल और राजपाल सहित अन्य मौजूद रहे।
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कृष्णा राणा काे सौंपी अध्यक्ष की कमान
सम्मेलन में सर्वसम्मति से 70 सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया। इसमें कृष्णा राणा को अध्यक्ष, देवकी नंद को सचिव और हर दयाल को कोषाध्यक्ष चुना गया। वहीं, प्रेम चौहान, कृष्ण, दर्शन, महेंद्र, रणवीर, वेद राम, शिक्षा, रक्षा, ऋषि, वीर सिंह, संदीप, नरेश को सह सचिव और काकू, ओपी चौहान, पदम, देवेंद्र, कपिल, किशन देव, मानदास, मनोरमा चौहान, चमन, परस राम, भगवान दास, डोला राम और धन सिंह को उपाध्यक्ष चुना गया।