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Rampur Bushahar News: रोहल में देवाल्डू पर्व की धूम, खूब चला मेहनमाननवाजी का दौर

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देवता के स्वर्ग प्रवास से लौटने पर लोगों ने लिया आशीर्वाद, सदियों से निभाई जा रही परंपरा
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राजेश हंसरेटा।

रोहड़ू। छौहारा क्षेत्र के रोहल पंचायत में ग्रामीण आज भी पुरातन देव परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। इसको लेकर पंचायत के मंजवाडी, जतवानी, चिचवाडी, गईचवाडी और थाना गांव में देवता महाराज पवासी का दो दिवसीय देव पर्व देवाल्डू धूमधाम से मनाया गया। पर्व के पहले दिन संक्रांति पर ग्रामीणों ने कुल देवता पवासी की देवलोक से वापसी पर आशीर्वाद लिया। इसके बाद परंपरा के अनुसार घरों में मेहमाननवाजी हुई। पवासी देवता के मोतमीन कैलाश मेहता ने बताया कि रोहल में सदियों से कुल देवता पवासी की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि देवता पवासी सदियों से तांबे की छोटी पालकी में ही स्थापित थे। लामा विद्वानों की सलाह पर स्थानीय लोगों ने देवता पवासी को बड़े रथ में स्थापित करने का निर्णय लिया। इसे रोहल के मंजवाड़ी गांव में स्थित माता कोटी में सभी दैविक परंपराओं का निर्वहन कर पालकी में स्थापित किया गया। इस परंपरा के आधार पर कुल देवता एक रात मंजवाड़ी गांव में बिताते हैं। पर्व के दूसरे दिन देव स्थल जागा सपनाड मंदिर जाते हैं। तबसे देवाल्डू परंपरा को रोहल के लोग मनाते हैं।
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इनसेट
दोस्ती निभाने की है खास परंपरा



देवाल्डू पर्व को मनाने के साथ रोहल में दोस्ती को निभाने की परंपरा भी आज तक कायम है। परिवार के हर आयु वर्ग की महिला और पुरुष सदस्य का गांव में एक देवाल (दोस्त) बचपन से होता है। ये दोनों दोस्त दो दिनों में एक-दूसरे को अपने घर में मेहमाननवाजी करवाकर रिश्ते को और घनिष्ठ बनाने का धर्म निभाते हैं।
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