रामपुर और ठियोग शहर में दिनभर उमड़ी रही लोगों की भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर/ठियोग। ऊपरी शिमला, कुल्लू और किन्नौर जिले में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान शिव के भक्तों की शिवालयों में खूब भीड़ उमड़ती है। इस पर्व के दिन विशेष पकवानों का भी खूब दौर चलता है। वहीं, कई परंपराओं को भी निर्वहन होता है। इनमें एक खास परंपरा बासी का निर्वहन किया जाता है। शिवरात्रि के दूसरे दिन लोग घरों में पकाए गए पकवान लेकर अपनी बहन और बेटियों के घर पहुंचाते हैं, जिसे बासी कहा जाता है। देवी पार्वती को हिमाचल की पुत्री माना जाता है। महाशिवरात्रि को विवाह के बाद लोग अपनी पुत्री स्वरूप देवी को भोजन देने जाते हैं। यह प्रथा इस क्षेत्र में बेटियों के विवाह के बाद भी निभाई जाती है। जब दूसरे दिन माता-पिता और भाई अपनी ब्याही बेटी और जवाईं को भोजन लेकर जाते हैं। बासी देने का यह सिलसिला कई रोज चलता है। परिवार की सही दूर पार ब्याही बेटियों को बांटा दिया जाता है। इस त्योहार के लिए बड़ी मात्रा में गुड़, तेल आटा आदि बिकता था, लेकिन अब पकवान पकाने की परंपरा कम हुई है।
बाजारों में रही भीड़
पर्व को लेकर सोमवार को रामपुर और ठियोग शहर के बाजारों में लोगों की खूब भीड़ उमड़ी। लोगों ने दिन भर शहर पहुंचकर खरीदारी की। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर रामपुर और साथ लगते कुल्लू जिले के लोगों में खासी रुचि रहती है। पर्व के दिन लोग दिन भर व्रत रखते हैं और रात्रि में विशेष पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखते हैं। शिव पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य पर मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर लोग कई दिन पहले से तैयारियां शुरू करने लग जाते हैं। घरों की साफ-सफाई की जाती है। पर्व को लेकर सोमवार को रामपुर शहर में लोग खासी संख्या में पहुंचे। लोगों के आने से शहर में रौनक लौट आई। लोगों ने तेल, आटा, सूखे मेवे, गुड़ और अन्य खाद्य सामग्रियों की जमकर खरीदारी की। वहीं, ठियोग के शाली बाजार में भी त्योहार से जुड़ी सामग्री बेचने वाली दुकानों में खासी भीड़ रही।
सूखे की आशंका से कम हो रही खरीदारी
अपर शिमला में शिवरात्रि को सबसे प्रमुख त्योहार माना जाता है। भगवान शिव और देवी पार्वती के शुभ विवाह के प्रतीक स्वरूप मनाए जाने वाले इस त्योहार का आरंभ माघी पूर्णमासी से होता है। हालांकि, इस वर्ष बर्फ कम गिरने और सूखे की आशंका से लोग अधिक खरीदारी से बच रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिवरात्रि का त्योहार पारंपरिक विधि से हर साल मनाया जाता है। त्योहार के दिन लोग अपने घरों के बाहर पारिजात के पत्तों का गुच्छा बना कर टांगते हैं, जिसे चांदुआ कहा जाता है। पर्व के दिन मीठे पकवान बनाए जाते हैं। सुबह से ही लोग चूल्हों पर तेल की कढ़ाई चढ़ा कर पोलटू, स्नासे, काली रोटी, पकौड़े आदि बनाते हैं। रात्रि में शिव पार्वती की पूजा होती है। कई गांवों में रात्रि जागरण भी होता है।
रामपुर बाजार में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर लोग खरीददारी करते हुए। संवाद