. नर्सिंग स्कूल की छात्राओं और अभिभावकों ने लगाए हैं गंभीर आरोप
. शैक्षणिक अव्यवस्थाओं को लेकर अभिभावक प्रधानमंत्री को भेज चुके हैं शिकायत पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
जीएनएम नर्सिंग संस्थान खनेरी में अनियमितताओं और शैक्षणिक अव्यवस्थाओं के आरोप के बाद खनेरी अस्पताल प्रशासन ने प्रधानाचार्य को हटा दिया है। अब सिस्टर ट्यूटर मुन्नी जांगमो को प्रधानाचार्य का प्रभार सौंपा गया है। इस संबंध में खनेरी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रोशन कौंडल ने पत्र जारी किया है। पत्र में कहा है कि छात्राओं और अभिभावकों की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के कारण इस मामले की तत्काल जांच आवश्यक है, इसलिए जांच पूरी होने तक प्रधानाचार्य का कार्यभार सिस्टर ट्यूटर को सौंपा जाता है। हालांकि, छात्राओं के अभिभावक इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री को शिकायत पत्र भेज चुके हैं। इस संबंध में उपमंडल प्रशासन और संबंधित प्रधानाचार्य को भी पत्र जारी कर सूचित किया गया है। महात्मा गांधी खनेरी चिकित्सा सेवा परिसर के चिकित्सा अधीक्षक ने जारी पत्र में कहा है कि अप्रैल में एसडीएम रामपुर को खनेरी स्थित जीएनएम नर्सिंग संस्थान के कामकाज के संबंध में कुछ शिकायतें प्राप्त हुईं। ये शिकायतें मुख्य रूप से भोजन व्यवस्था, छात्रावास आवास, स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता, संस्थागत वातावरण, शुल्क वसूली प्रथाओं, अंधविश्वास से संबंधित गतिविधियों, छात्रों पर लगाए गए प्रतिबंध और छात्र कल्याण से संबंधित अन्य मामलों की थीं। मामले की गंभीरता को देखने हुए एसडीएम ने संस्थान का निरीक्षण किया। निरीक्षण में संस्थान में काफी अनियमितताएं सामने आईं। एसडीएम ने रिपोर्ट बनाकर निदेशालय को भेजी।
आक्रोशित अभिभावकों ने किया अस्पताल और संस्थान का घेराव
कार्रवाई में देरी होने के कारण आक्रोशित अभिभावकों ने अस्पताल प्रबंधन और संस्थान का घेराव किया। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अभिभावकों ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री समेत उपायुक्त और आयोग को शिकायत पत्र भेजा। इसके बाद दो सप्ताह बाद अस्पताल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए प्रधानाचार्य को हटा दिया।
एसडीएम ने निदेशालय को भेजी थे ये रिपोर्ट
एसडीएम की निदेशालय में भेजी रिपोर्ट में बताया गया कि छात्रावास परिसर में काफी अनियमितताएं हैं। स्वच्छता सुविधाओं में कमी है। इसके अलावा उचित पोषण की कमी, अंधविश्वास से जुड़ी गतिविधियों, गैर शैक्षणिक कार्यों और पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याओं का छात्रों को सामना करना पड़ रहा था। लिखित शिकायतों में छात्राओं के अभिभावकों ने भी नर्सिंग संस्थान, छात्रावास परिसर और मेस प्रबंधन के कामकाज के संबंध में इसी तरह के आरोप लगाए थे।