नेरवा (रोहडू) मौसम में एकाएक आए बदलाव के बाद बीते सप्ताह हुई बारिश ने गुठलीदार फलों में जान फूंक दी है। बारिश होने से जमीन में पर्याप्त नमी हो गई है। इसके कारण प्लम, बादाम, आडू, शकरपारा और खुमानी सहित अन्य फलों को संजीवनी मिली है। बारिश होने से फलों का आकार बढ़ेगा और फल पेड़ से जमीन पर भी नहीं गिरेंगे। दूसरी ओर पेड़ों को कई प्रकार की बीमारियों से भी निजात मिलेगी। सर्दियों में सूखे जैसे हालात होने से चौपाल उपमंडल के कई क्षेत्रों में प्लम और खुमानी सहित अन्य गुठलीदार फलों की अच्छी सेटिंग नहीं हो पाई थी।
फ्लाविरंग के दौरान बारिश होने से फलों की सेटिंग प्रभावित हो गई थी। कई इलाकों में प्लम, बादाम सहित अन्य फलों की बंपर सेटिंग हुई है। ऐसे में बारिश न होने से फलों का आकार सही प्रकार से नहीं बढ़ रहा था और ड्रॉपिंग की समस्या भी बढ़ सकती थी। सूखे के कारण बागवानों को सेटिंग हुए फलों के दाने पीले पड़ने की चिंता भी सताने लगी थी लेकिन बारिश होने से अब गुठलीदार फलों का आकार बढ़ेगा। फल गिरने और प्लम के दाने पीले होने की समस्या से निजात मिलेगी। सलमान, राकेश, प्रेम शर्मा और सूरत राम शर्मा आदि बागवानों ने बताया कि बारिश से स्टोन फ्रूट को काफी फायदा पहुंचा है। सूखे के कारण फलों का साइज नहीं बढ़ रहा था और बीमारियों से भी अब छुटकारा मिलेगा।
पोलिया, केदी, नेरवा, लालपानी, मानुभाविया, पुजारली और भरानु आदि निचले क्षेत्र की पंचायतों में स्टोन फ्रूट की हजारों पेटियों का उत्पादन होता है। हजारों उत्पादकों ने बारिश होने से राहत की सांस ली है। बारिश फसलों के लिए संजीवनी मानी जा रही है।
बारिश स्टोन फ्रूट के लिए काफी लाभदायक है। बारिश होने से जमीन में नमी आने से फलों का आकार भी सही तरीके से बढ़ेगा।
सूरत राम शर्मा, प्रगतिशील बागवान