संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल पथ परिवहन निगम के नेरवा डिपो की हालत लगातार बदतर होती जा रही है। बसों, स्टाफ और स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी के चलते यात्रियों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि बसों का बीच रास्ते में ब्रेक डाउन होना अब आम बात बन चुकी है, जबकि खराब बसों तक स्पेयर पार्ट्स और मेकेनिक पहुंचाने के लिए डिपो के पास पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं है। नतीजतन, कई बसें सुनसान क्षेत्रों में कई दिनों तक खड़ी रहती हैं। परिचालकों की कमी ने डिपो की व्यवस्था को और अधिक चरमरा दिया है। 1 मई से डिपो के रोजाना चार रूट प्रभावित हो रहे हैं। बुधवार को भी परिचालकों के अभाव में नेरवा-मशौत, नेरवा-शलन और नेरवा-सराच रूटों पर बसें नहीं भेजी जा सकीं। डिपो में वर्तमान में 46 परिचालक कार्यरत हैं। इनमें से दो मेडिकल लीव पर हैं, जबकि दो अन्य सेवानिवृत्ति से पहले बची छुट्टियां काट रहे हैं। परिचालकों का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण उन्हें समय पर अवकाश तक नहीं मिल पा रहा। स्थिति यह भी है कि माइलेज पूरी कर चुकी बसों को सेवा से हटाने के बाद पिछले दो वर्षों में एक दर्जन से अधिक रूटों को क्लब करना पड़ा है। ऐसे में एक बस के खराब होते ही कई रूट प्रभावित हो जाते हैं। डिपो लंबे समय से स्पेयर पार्ट्स की किल्लत से भी जूझ रहा है। अधिकांश जरूरी पार्ट्स नेरवा में उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें तारा देवी डिपो से मंगवाना पड़ता है, जिससे बसों की मरम्मत में कई दिन लग जाते हैं। बीते वर्ष 22 नवंबर को नेरवा डिपो की एक बस उत्तराखंड में ब्रेक डाउन हो गई थी और करीब एक सप्ताह तक सुनसान क्षेत्र में खड़ी रही। बाद में मामला उजागर होने पर तारा देवी डिपो से मेकेनिक और स्पेयर पार्ट्स भेजकर बस को ठीक करवाया गया था।
परिचालकों की कमी के कारण रूट प्रभावित हो रहे हैं। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। स्टाफ की कमी पूरी होते ही स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
रोशन गजटा,
बस अड्डा प्रभारी