मध्यम ऊंचाई वाले बगीचों पर दिख रहा असर, बागवानों को भारी नुकसान की आशंका
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संवाद न्यूज एजेंसी रोहड़ू। क्षेत्र में पिछले सप्ताह हुई लगातार बारिश का असर सेब की फसल पर साफ दिखने लगा है। जिन बगीचों में सेब के पेड़ों पर फूल खिले थे, उनमें दाने नहीं बन पाए हैं। खासकर, मध्यम ऊंचाई तक वाले बगीचों में यह समस्या व्यापक रूप से सामने आ रही है, जिससे बागवानों को भारी नुकसान की आशंका है। बागवानों का कहना है कि फूल पूरी तरह विकसित होने के बावजूद उनमें परागण और निषेचन की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हो पाई। परिणामस्वरूप, अब फूल सूखकर गिर रहे हैं और जिनमें दाने बनने चाहिए थे, वे खाली रह गए हैं। इससे सीधे तौर पर उत्पादन में कमी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, सेब के पौधों में फ्लॉवरिंग स्टेज के दौरान मौसम की अनुकूलता बेहद जरूरी होती है। पिछले सप्ताह लगातार बारिश, बादल और ठंडी हवाओं ने तापमान को काफी नीचे गिरा दिया था। ऐसे हालात में परागण प्रक्रिया बाधित हो जाती है। मधुमक्खियां और अन्य परागणकर्ता कीट सक्रिय नहीं हो पाते, जिससे फूलों में पराग का स्थानांतरण नहीं हो पाता। बागवानी वैज्ञानिकों का कहना है कि सेब में सफल फल सेटिंग के लिए 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान और सूखा मौसम अनिवार्य होता है, लेकिन लगातार नमी और कम तापमान के कारण परागकण निष्क्रिय हो जाते हैं और फूलों में निषेचन नहीं हो पाता। इसी वजह से दाने नहीं बनते और बाद में फूल झड़ जाते हैं। इसके अलावा, अत्यधिक नमी के कारण फफूंदजनित रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है, जो फूलों को अंदर से नुकसान पहुंचाते हैं।
फफूंदनाशी दवाओं का छिड़काव करें
बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी डाॅ. उषा शर्मा ने सलाह दी है कि बागवान मौसम साफ होते ही फफूंदनाशी दवाओं का छिड़काव करें और बगीचों में मधुमक्खी बक्सों की व्यवस्था करें ताकि भविष्य में परागण बेहतर हो सके। साथ ही, पौधों को संतुलित पोषण देना भी जरूरी है।.
उत्पादन में आ सकती है गिरावट
उद्यान विकास अधिकारी यशवंत बगींटा का कहना है कि भारी बारिश से सेब की फसल को बड़े भाग में मध्यम ऊंचाई में नुकसान देखने को मिल रहा है। यदि आने वाले दिनों में मौसम सामान्य नहीं हुआ, तो इस सीजन में उत्पादन में गिरावट देखने को मिल सकती है।