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Rampur Bushahar News: नेरवा-शिमला मार्ग पर भूस्खलन से खतरा

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नेरवा से शिमला मार्ग पर कई साल से हो रहा भूस्खलन। संवाद
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नेरवा बाजार और लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह के बीच गिरता है मलबा
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संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। नेरवा-शिमला मुख्य मार्ग पर बाजार और लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह के बीच का हिस्सा लंबे समय से भूस्खलन की समस्या से जूझ रहा है। हल्की बारिश होते ही पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरना शुरू हो जाता है, जिससे सड़क बार-बार अवरुद्ध हो जाती है। इस कारण वाहनों की आवाजाही घंटों तक ठप रहती है, जबकि पैदल चलने वालों को भी जान जोखिम में डालकर मार्ग से गुजरना पड़ता है। यह मार्ग नेरवा के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है, जहां से रोजाना विद्यार्थी आते-जाते हैं। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों के लोग भी सरकारी कार्यालयों, अस्पताल और बाजार तक पहुंचने के लिए इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग की अनदेखी के कारण यह समस्या विकराल बन चुकी है। आठ वर्ष पहले ही स्थायी समाधान किया गया होता, तो न केवल लोगों को परेशानी उठानी पड़ती, बल्कि विभाग को भी हर साल मलबा हटाने पर लाखों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते। दरअसल, इस मार्ग के ऊपर से नेरवा-देइया-कुपवी सड़क गुजरती है। इसके चौड़ीकरण के दौरान निकला मलबा निर्धारित स्थानों पर डंप करने के बजाय इधर-उधर ही डाल दिया गया। यही मलबा बारिश के समय बहकर नीचे मुख्य मार्ग पर आ गिरता है और कई बार बरसाती नाले का रूप ले लेता है। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के नीचे नेरवा बस अड्डा और घनी आबादी वाला इलाका स्थित है। हर साल मलबा लोगों के घरों में घुस जाता है, जिससे भारी नुकसान होता है। स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि बस अड्डे में खड़ी बसों को हटाना पड़ता है।
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क्षेत्र की मिट्टी की जांच करवाई गई है। विशेषज्ञों ने सॉइल मिटिगेशन तकनीक से उपचार की सलाह दी है। सरकार ने करीब 7.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। नेरवा और खगना में इस तकनीक से कार्य किया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से डीपीआर तैयार की जा रही है। -सुनील शर्मा, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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