किन्नौर में चर्खा स्वयं सहायता समूह और शिल्पकारों ने मनाया हथकरघा दिवस
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संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले की हथकरघा की विरासत को संजोने पर किन्नौरी लिंगचे को जीआई टैग मिला है। शुक्रवार को चर्खा स्वयं सहायता समूह और स्थानीय शिल्पकारों ने शुक्रवार को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर चर्खा स्वयं सहायता समूह की प्रधान आशा नेगी ने बताया कि 5 अगस्त को किन्नौरी लिंगचे को भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने जीआई टैग प्रदान किया है। यह उपलब्धि किन्नौर और स्थानीय बुनकर समुदाय के लिए ऐतिहासिक है। आशा नेगी ने बताया कि जीआई टैग से इस पारंपरिक उत्पाद की विशिष्ट पहचान सुरक्षित होगी। इससे बाजार में इसकी विश्वसनीयता बढ़ेगी और शिल्पकारों को नए अवसर मिलेंगे।
जेएसडब्ल्यू हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड के महाप्रबंधक पीके झा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। पीके झा ने कहा कि हथकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भर भारत की पहचान है। किन्नौरी लिंगचे को जीआई टैग मिलना पूरे किन्नौर के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि बुनकरों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी। जेएसडब्ल्यू हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड और जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन ऐसे प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे। कार्यक्रम में चर्खा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और स्थानीय शिल्पकारों ने अपने पारंपरिक हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया। सभी ने भारतीय हथकरघा परंपरा के संरक्षण का संकल्प लिया। उन्होंने वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी दोहराया। चर्खा स्वयं सहायता समूह महिला सशक्तीकरण और पारंपरिक हथकरघा कला के संरक्षण का मॉडल बन चुका है।