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किन्नौर में पहाड़ बचाने के लिए उठे हजारों हाथ

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बनारस विश्वविद्यालय में किन्नौर जिले के छात्र विरोध प्रकट करते हुए। -संवाद - फोटो : RAMPUR-HP
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धर्मेंद्र सिंह बोज्ञाटो
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रामपुर बुशहर। जिला किन्नौर में बटसेरी और निगुलसरी जैसे भयावह हादसे होने के बाद लोग पहाड़ों को बचाने के लिए हजारों लोग एकजुट होने लगे हैं। परियोजनाओं के निर्माण के लिए होने वाली भारी ब्लास्टिंग को देखते हुए लोगों ने इसके खिलाफ जन आंदोलन खड़ा कर दिया है। इस आंदोलन को जिले की 73 पंचायतों से समर्थन मिला है। जिले के हजारों लोग एकजुट होकर सिर्फ एक ही आवाज उठा रहे हैं कि अब वह किसी भी परियोजना को जिले में नहीं लगने देंगे। इसके लिए लोगों ने ‘नो मींस नो, सेव किन्नौर’ का नारा दिया है।
अभियान के तहत लोग गांव, कस्बों में बैठकें कर मांग उठा रहे हैं। साथ ही जिले में जगह-जगह ‘नो मींस नो, सेव किन्नौर’ के बैनर लगाए जा रहे हैं। जिले में ही नहीं किन्नौर के युवाओं ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में भी किन्नौर के पहाड़ों को बचाने के लिए प्रदर्शन किया। इसका मकसद सरकार को जगाना है ताकि वह किन्नौर के संवेदनशील पहाड़ों और यहां रहने वाले लोगों के अस्तित्व पर मंडरा रहे इस खतरे से अवगत हो सके। लोगों का कहना है कि जिले में अब किसी भी कीमत पर बिजली परियोजनाओं का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।
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अभियान को आगे बढ़ाने के लिए कई समूह एकजुट हो रहे हैं। इसमें सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही परियोजनाओं से जिला किन्नौर पर मंडरा रहे संभावित खतरे के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। जिले की 73 पंचायतों में जाकर उनके समर्थन के लिए प्रस्ताव पास किया जा रहा है। थैमगारंग पंचायत की प्रधान मनोहर देवी ने कहा कि किन्नौर के भविष्य को बचाने के लिए बिजली परियोजनाओं पर रोक लगनी चाहिए। इसके लिए पंचायत के सभी लोगों ने मिलकर प्रोजेक्टों पर रोक लगाने के लिए प्रस्ताव पारित किया है।
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आधा दर्जन पंचायतों ने प्रस्ताव किया पास
संघर्ष समिति रारंग के उपाध्यक्ष और युवक मंडल खदरा के प्रधान सुंदर सिंह नेगी ने बताया कि अभियान के तहत बिजली विद्युत परियोजनाओं के खिलाफ आधा दर्जन पंचायतों ने ग्रामसभा में प्रस्ताव पास किया है। इसमें तय किया गया है कि वह भविष्य में किसी बिजली परियोजना को नहीं बनने देंगे। ताकि किन्नौर जिला का विनाश होने से रोका जा सके।
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