संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब बहुल क्षेत्र में कश्मीर से लाई जा रही गैर प्रमाणित और बिना पंजीकरण वाली सेब की नर्सरी की अवैध बिक्री पर प्रशासन की कार्रवाई केवल दिखावा बनकर रह गई है। ठियोग से लेकर चौपाल, जुब्बल, कोटखाई और रोहड़ू के दूरदराज क्षेत्रों तक पिकअप वाहनों में भरकर अवैध पौधों को खुलेआम बेचा जा रहा है। इस अवैध कारोबार में कुछ स्थानीय लोग भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। स्थानीय नर्सरी उत्पादक इस अवैध धंधे से परेशान हैं। चार फरवरी को रोहड़ू क्षेत्र में तीन अलग-अलग स्थानों से करीब 50 हजार गैर प्रमाणित फलदार पौधे पकड़े गए थे, लेकिन इस पर प्रशासन ने न तो कोई ठोस कार्रवाई की, न चालान किए और न ही जब्ती की प्रक्रिया अपनाई। इस कारोबार में शामिल लोगों को केवल चेतावनी देकर पौधे उठाकर क्षेत्र से बाहर ले जाने को कहकर छोड़ दिया गया। परिणामस्वरूप, अवैध कारोबारियों के हौसले और बढ़ गए और वही खेप अब फिर से गांव-गांव बिक्री के लिए पहुंच रही है। इससे भविष्य में बीमारी व खतरनाक वायरस के संक्रमण का सेब कारोबार पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना वैध दस्तावेजों के लाए गए पौधों की गुणवत्ता, स्वास्थ्य और प्रमाणित स्रोत का कोई रिकॉर्ड नहीं होता है। ऐसे पौधों के माध्यम से बगीचों में रोग फैलने, फसल विफल होने और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। यह सीधे तौर पर हिमाचल के बागवानी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। बागवानी विभाग ने स्पष्ट किया है कि हिमाचल प्रदेश फल नर्सरी पंजीकरण एवं विनियमन अधिनियम-2015 और नियम-2020 के तहत अवैध नर्सरी संचालकों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने किसानों से अपील की है कि पौधे खरीदते समय नर्सरी संचालक का वैध लाइसेंस व पंजीकरण प्रमाण पत्र अवश्य देखें और बिना बिल कोई भी पौधा न खरीदें।
गैर पंजीकृत पौधशालाओं, सड़क किनारे बिक रहे पौधों तथा बिना दस्तावेजों के बेचे जा रहे फलदार पौधों से सावधान रहें। ऐसे मामलों की सूचना नजदीकी बागवानी विस्तार अधिकारी, विकास अधिकारी अथवा विषय विशेषज्ञ को तुरंत दें। विभाग इस पर जरूर कार्रवाई के लिए तैयार है। -
यशवंत बगींटा, उद्यान विकास अधिकारी रोहड़ू