एफआरडीपी परियोजना के अंतर्गत 10 किसानों को वितरित किए गए ऑयस्टर मशरूम बैग वा रैक वितरण। स्रोत :
खुंब अनुसंधान केंद्र चंबाघाट में 30 किसानों ने लिया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
चायल(सोलन)। हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के उपमंडल कंडाघाट की सकोड़ी और झाझा पंचायत के किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। एचडीएफसी (परिवर्तन एवं माउंट वैली डेवलपमेंट एसोसिएशन की ओर से एफआरडीपी परियोजना के तहत 10 प्रगतिशील किसानों को ऑयस्टर मशरूम बैग और रैक वितरित किए गए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
इस परियोजना के तहत चयनित 30 किसानों के लिए निदेशक खुंब अनुसंधान चंबाघाट सोलन में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को ढींगरी मशरूम की वैज्ञानिक खेती, आधुनिक उत्पादन तकनीक और खेती के दौरान आने वाली चुनौतियों व उनके समाधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञ एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. बीएल अत्री और डॉ. अनिल ने किसानों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक विधियों से अवगत कराया। उन्होंने कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया को सैद्धांतिक के साथ-साथ प्रायोगिक तरीके से भी समझाया। इसके अलावा, किसानों को मशरूम फार्म का भ्रमण भी करवाया गया, जिससे उन्हें जमीनी स्तर पर कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। विशेषज्ञों ने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि मशरूम की खेती कम लागत और कम जगह में स्वरोजगार का एक बेहतरीन साधन है। किसानों ने भी इस कार्यक्रम में गहरी रुचि दिखाई और इसे भविष्य में आर्थिक लाभ के लिए एक मील का पत्थर बताया।