ठियोग (रामपुर बुशहर)। कहने को तो ठियोग को ऊपरी शिमला का मुख्यद्वार कहा जाता है, लेकिन अगर शहर की दिक्कतों की बात की जाए तो एक नहीं बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं, जिनके कारण आम जनता को परेशान होना पड़ता है।
इन्हीं में से एक है पेयजल की समस्या। मौसम बरसात का हो तो गाद के कारण शहर में पीने के पानी की किल्लत हो जाती है और अगर गर्मियों की बात की जाए तो जलस्तर घटने के कारण पानी नहीं मिल पाता है, लेकिन अगर मौसम का कोई कहर नहीं तो दो दशक पुरानी पेयजल योजना की लाइनें फट जाती हैं। ऐसे में जगह-जगह रिसाव होने से लोगों को पानी नहीं मिल पाता, वहीं जमीनों को भी नुकसान पहुंच रहा है।
21 वर्ष पूर्व साल 2000 में ठियोग क्षेत्र की जनता के लिए यह पेयजल योजना शुरू की गई थी। क्षेत्र के हजारों लोगों को पेयजल योजना शुरू होने से राहत मिली थी, लेकिन वर्तमान में हालात ऐसे हो गए है कि पेयजल योजना की लाइन खस्ताहाल होने के कारण आए दिन कहीं न कहीं फट जाती है और ठियोग क्षेत्र के हजारों लोगों को पेयजल समस्या की परेशानी का सामना करना पड़ता है। पिछले कई सालों से यह सिलसिला जारी है। इतना ही नहीं, आईपीएच को भी हर वर्ष इन लाइनों की मरम्मत के लिए 8 से 10 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि आम जनता के पैसों का सही उपयोग होना चाहिए और इन पाइपों को बदलना चाहिए। मंगलवार को भी गजेड़ी कंडा के पास यह पेयजल लाइन फट गई और स्थानीय निवासी रोशन के सेब के बगीचे को भी नुकसान हुआ। 20 वर्षों में यह स्कीम पूरी तरह से हांफ गई है। ऐसे में अगर समय रहते इस पर ध्यान नही दिया गया तो क्षेत्र में पेयजल समस्या और गहरा जाएगी।
उधर, आईपीएच विभाग ठियोग के एसडीओ प्रदीप चौहान ने बताया कि वर्ष 2000 में यह पेयजल योजना शुरू हुई थी, जिसकी पाइपें अब पुरानी हो चुकी हैं। हर वर्ष विभाग इनकी मरम्मत पर 8 से 10 लाख रुपये खर्च करता है। संवाद