न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने सुनाया फैसला
अब अदालत सजा पर करेगी सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आरोपी को दोषी ठहराया है। यह मामला 18.19 लाख रुपये के चेक बाउंस से संबंधित है। शिकायतकर्ता गोपाल एग्रो केमिकल्स और पैकिंग सामग्री का कारोबार करता है, जबकि आरोपी अनुराग कीटनाशक, पेस्टिसाइड और पैकेजिंग सामग्री की दुकान चलाता है। दोनों कई वर्षों से एक-दूसरे के साथ व्यापार कर रहे थे। अनुराग ने गोपाल चौहान की दुकान से सामान खरीदा था। इस खरीद के भुगतान के लिए उन्होंने 4 दिसंबर, 2019 को 18.19 लाख रुपये का चेक जारी किया। यह चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद गोपाल ने एक कानूनी नोटिस भेजा। अनुराग ने नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर भी राशि का भुगतान नहीं किया।
अदालत में आरोपी अनुराग ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की। उन्होंने यह भी माना कि उन्हें कानूनी नोटिस प्राप्त हुआ था। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उनकी बकाया देनदारी चेक की राशि से कम थी। इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई सबूत पेश नहीं किया। शिकायतकर्ता ने अपनी गवाही में बताया कि आरोपी पिछले 8 से 10 वर्षों से उनकी दुकान से सामान खरीद रहा था। बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि शिकायत समय से पहले दायर की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि इतने बड़े लेनदेन के लिए कोई बिल या दस्तावेज मौजूद नहीं थे।
अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 139 के तहत वैधानिक अनुमान को सही माना। उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए, अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा चेक भी धारा 138 के दायरे में आते हैं। आरोपी अपनी देनदारी कम साबित करने में विफल रहा। इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने अनुराग को दोषी ठहराया। अब अदालत सजा पर सुनवाई करेगी।