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Rampur Bushahar News: धूल फांक रही लाखों रुपये की मशीनें, अब भेजी जा रही डीआरडीओ वापस

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सतलुज नदी में ठिकाने लगाया जा रहा सैकड़ों टन कचरा। - फोटो : RAMPUR-HP
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रामपुर बुशहर। सरकारें आती और जाती रहीं, लेकिन रामपुर की आसपास की पंचायतों में कचरा प्रबंधन आज भी एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। सभी सरकारें कचरा प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ भारत का नारा देती आई हैं और स्वच्छता अभियानों पर लाखों रुपये की राशि भी खर्च की जा रही है, लेकिन बावजूद इसके न तो प्रदूषण घट रहा है और न ही स्वच्छता अभियान सफल हो पा रहे हैं। कचरा प्रबंधन आज के दौर की एक सबसे बड़ी समस्या बन गई है।
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रामपुर शहर के साथ सटी पंचायतों में अवैध रूप से कचरा सतलुज नदी, नालों और खुले स्थानों में ठिकाने लग रहा है। वर्षों पूर्व क्षेत्र की आधा दर्जन पंचायतों को लाभान्वित करने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र की योजना तैयार कर लाखों रुपये का बजट भी स्वीकृत हुआ, लेकिन व्यवस्था के फेर में फंसे संयंत्र का निर्माण आज भी अधर में है। अब विकास खंड कार्यालय ने लाखों रुपये की मशीनरी वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
गौर हो कि निरमंड खंड की आधा दर्जन से अधिक पंचायतों को लाभान्वित करने के लिए करीब ढाई वर्ष पूर्व विकास खंड की खरगा पंचायत में करीब 54 लाख रुपये से ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाने की योजना तैयार की गई थी। इस संयंत्र में गीला और सूखा दोनों तरह के कचरे का प्रबंधन किया जाना था। संयंत्र में तीन मशीनें स्थापित की जानी थी, जिनकी कीमत करीब 24 लाख रुपये है। ये मशीनें डीआरडीओ कुल्लू की ओर से स्वीकृत की गई थी। संयंत्र के लिए पंचायत क्षेत्र की काजू खड्ड में निजी भूमि का चयन किया गया, लेकिन पंचायत चुनाव के बाद नई पंचायत बनते ही कचरा प्रबंधन संयंत्र निर्माण का कार्य ठंडे बस्ते में पड़ गया। ढाई वर्ष से 24 लाख रुपये की लागत की तीन मशीनें जंग खा रही हैं। इस कचरा प्रबंधन संयंत्र से ब्रौ, जगातखाना, तुनन, खरगा, पोशना, सरघा और कुश्वा पंचायत से निकलने वाले कचरे का निदान किया जाना था। इस योजना पर करीब 54 लाख रुपये की राशि खर्च की जानी थी, लेकिन पंचायत की ओर से दिलचस्पी न दिखाने के कारण अब यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाएगी। शहर के साथ सटे सेमी अर्बन इलाके ब्रौ, जगातखाना, चाटी और थाचवा क्षेत्र में कचरा प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सैकड़ों टन कचरा सतलुज नदी किनारे, नालों और खुले स्थानों में ठिकाने लगाया जा रहा है। इस कचरे से जहां पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, वहीं कचरे से लावारिस पशुओं और बंदरों की समस्या भी विकराल रूप धारण कर रही है। संवाद
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समस्या के समाधान के साथ खुलने थे रोजगार के द्वार
इस संयंत्र के लगने से जहां कचरा प्रबंधन की समस्या का हल होना था, वहीं पंचायत के आठ लोगों को इस योजना से रोजगार के द्वार खुलने थे, लेकिन अब संयंत्र का निर्माण न होने के कारण न कचरा प्रबंधन होगा और न ही बेरोजगारों को रोजगार मिल पाएगा।
क्या कहते हैं खंड विकास अधिकारी
खंड विकास अधिकारी निरमंड मृकना ने बताया कि खरगा पंचायत में प्रस्तावित ठोस कचरा संयंत्र निर्माण के लिए चयनित भूमि का मालिक जमीन का बाजार मूल्य मांग रहा है, इस कारण पंचायत ने संयंत्र लगाने को लेकर मनाही की है। विकास खंड की ओर से कचरा प्रबंधन संयंत्र के लिए लाई गई मशीनों को डीआरडीओ कुल्लू को वापस भेजा जा रहा है।
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