चौरा गांव में मधुमक्खी का बक्सा तोड़ा, वन विभाग से पिंजरा लगाकर भालू को पकड़ने की मांग
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क्षेत्र में नहीं थम रही जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में पहुंचने की घटनाएं संवाद न्यूज एजेंसी कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। ग्रामीण क्षेत्रों में भालू रिहायशी इलाकों में पहुंचकर उत्पात मचा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। इन दिनों कुमारसैन के तीन गांवों के ग्रामीण भालू के कारण परेशान हैं। क्षेत्र में कई दिनों से मादा भालू अपने बच्चों के साथ घूमती दिखाई दे रही है। रविवार सुबह भालू ने घर में बने मधुमक्खी के बक्से को तोड़ दिया। ग्रामीणों ने वन विभाग से भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा स्थापित करने की मांग उठाई है। उपमंडल कुमारसैन के भनौली, जुबडू और चौरा गांव में ग्रामीण भालू के कारण कई दिनों से परेशान हैं। रिहायशी इलाकों में भालू के आ धमकने से ग्रामीणों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीण अपने खेतों में काम के लिए नहीं जा पा रहे हैं। रविवार को भालू ने चौरा गांव के कुशाल के एक घर में बने मधुमक्खी के बक्से को क्षतिग्रस्त कर दिया। घर में रहने वाली किशोरी ने बताया कि भालू सुबह करीब 6:30 बजे घर के पास पहुंचा और घर की एक दीवार में लगे मधुमक्खी के बक्से को तोड़ दिया। मादा भालू अपने दो बच्चों के साथ यहां देखी गई। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष सुरेंद्र कौशल ने कहा कि क्षेत्र में भालू और अन्य जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। कुछ दिन पहले करेवथी पंचायत में एक व्यक्ति पर तेंदुए ने जानलेवा हमला किया। उन्होंने कहा कि भनौली, जुबड़ू और चौरा गांव में भालू के आतंक की सूचना वन विभाग को दी गई है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन विभाग से भालू की समस्या से निजात दिलाने के लिए पिंजरा स्थापित करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों की मांग के बाद वन विभाग जंजैली में लगाए गए पिंजरे को कुमारसैन ला रहा है। देर शाम तक पिंजरा स्थापित किया गया।
रात को जंगल की तरफ न जाएं
कुमारसैन के वन परिक्षेत्र अधिकारी अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि विभाग ने संबंधित क्षेत्र में गश्त शुरू कर दी है, जहां भालू की मौजूदगी पाई गई है। सुरक्षा के लिहाज से गांव में पिंजरा लगाने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि लोग अनावश्यक रात के समय जंगलों की ओर न जाएं और घरों के आसपास रोशनी का प्रयोग करें, ताकि जंगली जानवरों से बचा जा सके। उन्होंने भालू के दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करने का भी आह्वान किया है।
मौसम, जंगलों का वातावरण और जंगली जानवरों की गतिविधियों में लगातार बदलाव हो रहे हैं। सर्दियों में भालू शीत निद्रा में जाते हैं और इससे पूर्व वे पर्याप्त भोजन की आपूर्ति और वसा जमा करते हैं। बीते कुछ वर्षों की बात करें, तो भालुओं की शीत निद्रा में तब्दीली देखने को मिली है। सर्दियों के मौसम में भालू ग्रामीण इलाकों का रुख कर रहे हैं। जंगलों में खाद्य संसाधनों की कमी के कारण भी भालू रिहायशी इलाकों में भोजन की तलाश में पहुंच रहे हैं। जंगलों में बढ़ रही मानवीय गतिविधियां भी जंगल के परिवेश को बिगाड़ रही हैं। सड़कों के लगातार बिछते जाल के चलते भी जंगल और जंगली जानवरों का जीवन प्रभावित हो रहा है।