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कुल्लू की मंडियों में आए 22 लाख सेब के बॉक्स

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कुल्लू की सब्जी मंडी में सेब को छंटनी के बाद बॉक्स में पैकिंग करते कामगार। - फोटो : Kullu
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कुल्लू। कोरोना काल में बागवानों का स्थानीय मंडियों पर भरोसा बढ़ा है। बागवानों ने सेब दिल्ली भेजने की बजाय स्थानीय मंडियों में ही बेचना उचित समझा। जिले की फल मंडियों में आने वाले सेब बॉक्स का आंकड़ा 22 लाख के पार पहुंच गया है। अब सेब मंडियों में 22 लाख 35 हजार सेब बॉक्स आए हैं। बंदरोल सब्जी में सबसे अधिक सात लाख 72 हजार सेब बॉक्स आए।
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आनी उपमंडल के तहत आने वाली सब्जी मंडी खेगसू और ऊझी घाटी के तहह पतलीकूहल सब्जी मंडी में छह-छह लाख सेब के बॉक्स आए हैं। हालांकि, अब मंडियों में आने वाले सेब की आमद 60 से 70 फीसदी तक कम हो गई है। आगामी दो सप्ताह में सेब सीजन सिमटने की उम्मीद है।
अधिकतर सेब बगीचे खाली हो गए है। कुछ बागवानों के पास ही सेब बचा है। सब्जी मंडियों में सेब सीजन ठंडा पड़ने से बाहरी राज्यों से आए व्यापारी भी लौटना शुरू हो गए हैं। 15 अक्तूबर से ढालपुर मैदान में अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव शुरू होगा। दशहरा से पहले बागवान सेब बगीचों में तुड़ान समाप्त करने के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं। कुछ बागवान सेब सीजन निपटाने के बाद घास कटाई में व्यस्त हैं।
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घाटी के बागवान राकेश ठाकुर, रेवत राम, विनोद और वीर सिंह ने कहा कि घाटी की 60 फीसदी से अधिक सेब स्थानीय मंडियों में ही बिका। बागवान अब अनार को भी बेचने के लिए मंडियों में ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बागवानों का स्थानीय सेब मंडियों पर भरोसा बढ़ा है।
उधर, कृषि उपज विपणन समिति कुल्लू और लाहौल-स्पीति के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि इस बार मंडियों में सेब के 25 लाख बॉक्स पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले साल से कहीं अधिक है। स्थानीय मंडियों में बागवानों सेब के बेहतर दाम मिले हैं।
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