ऐसे में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत बढ़ रही है। प्रस्तावित बीएससी कोर्स के जरिये विद्यार्थियों को आपदा से जुड़े वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रबंधन संबंधी पहलुओं की पढ़ाई का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें आपदा के जोखिम को समझने और आपात स्थिति में प्रभावी तरीके से काम करने के लिए तैयार किया जा सकेगा। प्रस्तावित कोर्स में आपदा से पहले की तैयारी, जोखिम का आकलन, बचाव एवं राहत कार्य, आपदा के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण जैसे पहलुओं को शामिल किए जाने की संभावना है। हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और यहां आने वाली प्राकृतिक आपदाओं को भी अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा सकता है।
इससे विद्यार्थियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की व्यावहारिक चुनौतियों को समझने का अवसर मिलेगा। कार्यकारी परिषद से स्वीकृति मिलने पर सीटों की संख्या, प्रवेश प्रक्रिया, शैक्षणिक ढांचे और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद प्रवेश शुरू करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। आपदा प्रबंधन एवं हिमालयन शोध केंद्र पहले से ही हिमालयी क्षेत्र से जुड़े शोध और आपदा प्रबंधन के विषयों पर काम कर रहा है। इसी केंद्र के तहत नए स्नातक कोर्स के संचालन से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक और शोध संसाधनों से जोड़ने की योजना है। कोर्स शुरू होने पर हिमाचल के विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन में स्नातक स्तर पर अध्ययन का नया विकल्प राज्य में ही उपलब्ध हो सकेगा।