भारी बर्फबारी के चलते उत्तर भारत के कई राज्यों को रोशन करने वाले किन्नौर में पिछले 22 दिन में लोगों की जिंदगी अंधेरे में गुजर रही है। कड़ाके की ठंड में बिना बिजली लोगों की जिंदगी और दूभर बन गई है। जिले में कड़छम वांगतू 1000 मेगावाट क्षमता, बासपा 300 मेगावाट क्षमता, भावानगर 120 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
रामपुर में लगा 1500 मेगावाट का नाथपा झाकड़ी प्रोजेक्ट भी शिमला से दूर और किन्नौर से ज्यादा नजदीक है। इसके अलावा काशंग प्रोजेक्ट के तीन चरणों की क्षमता 193 मेगावाट की है, इस पर काम चल रहा है। थोपन पवारी 500 मेगावाट ज्यादा क्षमता का प्रोजेक्ट है।
इन प्रोजेक्टों पर पावर कारपोरेशन काम कर रही है। आने वाले समय में इन प्रोजेक्टों से भी देश के कई राज्यों को बिजली की सप्लाई होनी है। इनके अलावा दो से पांच मेगावाट के दर्जनों छोटे बिजली प्रोजेक्ट नालों और खड्डों में लगाए जाने प्रस्तावित हैं। इसके बावजूद किन्नौर को जनवरी की बर्फबारी के बाद रोशनी देखने को नहीं मिल सकी है।
यह किन्नौर की जनता के साथ त्रासदी है कि जिनके दम पर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में रोशनी होती है, वहां प्रशासन बिजली मुहैया करवाने में सफल नहीं हो पा रहा है।
किन्नौर जिले के उपायुक्त के जेएम पठानिया का कहना है कि रिकांगपिओ में दो तीन दिन के लिए बिजली बहाल हो गई थी। लेकिन फिर से बर्फबारी होने के चलते बिजली पूर्ण रूप से बंद है। उन्होंने कहा कि भारी बर्फबारी के चलते बिजली की आपूर्ति बहाल करने में समय लगेगा।
खंभे और तारें टूटने से दिक्कत
जिले में भारी बर्फबारी से बिजली के सैकड़ों खंभे टूट गए हैं। 22 किलोवाट क्षमता की लाइनें तक टूटी पड़ी हैं। बर्फबारी के दौरान इन्हें जोड़ना आसान नहीं है। ऐसे में प्रशासन और बिजली कंपनी के पास मौसम साफ होने तक मरम्मत कार्य शुरू करने के अलावा कोई चारा नहीं है।
ये गांव हैं बिना बिजली के
किन्नौर जिला के चौरा, कफौर, शिलानी, ननसपो, निगूलसरी, छोटा कंबा, बड़ा कंपा, दुमदी, रूपी के हुरवा, शिगारचा, डूबलिंग, मझ गांव, गुर गुरा, नालिंग-एक, नालिंग दो, नाथपा, निचार, काचे, पालिंगी, बारी, मुरंग, ग्रादे, ग्रांमे, पूजे, काशपा, पानवी, कुलिंगे, पानवी खा, कल्पा कोठी, तेलिंग, खवागी, पूह, रिब्बा, रिस्पा, मोरंग और सांगला पिछले 22 दिन से बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
हिमाचल में 23 हजार मेगावाट क्षमता
हिमाचल में 23,000 मेगावाट जल विद्युत क्षमता में से अब तक 9,368 मेगावाट का दोहन किया जा रहा है। प्रदेश में चिन्हित प्रोजेक्टों की क्षमता बारह हजार मेगावाट से ज्यादा है। इसमें से किन्नौर जिले में ही साढ़े तीन हजार मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट चलाए जाने हैं।