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IIT Mandi Research: बेहोशी की दवा के पाैधों में भी दिखा इंसानों जैसा असर, आईआईटी मंडी के शोध में खुलासा

Tue, 30 Jun 2026 05:20 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मनाली।

सार

आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों का यह शोध दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं एडवांस्ड बायोलॉजी और केमिकल एंड बायोमेडिकल इमेजिंग में प्रकाशित हुआ है। 
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आईआईटी मंडी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बेहोशी की दवा देने पर पौधों की कोशिकाएं भी इंसानी शरीर की तरह निश्चित क्रम में प्रतिक्रिया देती हैं। आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों के एक नए शोध में यह खुलासा हुआ है। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पौधों में न तो मस्तिष्क होता है और न ही तंत्रिका तंत्र, फिर भी उनकी सभी कोशिकाओं ने लगभग एक साथ एक जैसा व्यवहार दिखाया। आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों का यह शोध दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं एडवांस्ड बायोलॉजी और केमिकल एंड बायोमेडिकल इमेजिंग में प्रकाशित हुआ है। शोध का नेतृत्व संस्थान के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा, प्रोफेसर चयान कांति नंदी और उनकी टीम ने किया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज चेतना को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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टमाटर और बैंगन के पौधों की जड़ों का अध्ययन किया

शोध के लिए वैज्ञानिकों ने टमाटर और बैंगन के पौधों की जड़ों का अध्ययन किया। आधुनिक सूक्ष्मदर्शी तकनीक की मदद से जीवित कोशिकाओं के भीतर होने वाले बदलावों को देखा गया। अध्ययन में पाया गया कि बेहोशी की दवा देने के बाद सबसे पहले कोशिका का ऊर्जा बनाने वाला हिस्सा प्रभावित हुआ। इसके बाद दूसरे हिस्से क्रमवार निष्क्रिय होते गए और अंत में कोशिका का केंद्र प्रभावित हुआ। जब दवा का असर खत्म हुआ तो यही प्रक्रिया उल्टे क्रम में हुई और कोशिकाएं सामान्य स्थिति में लौट आईं।

वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई

वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि पौधों की सभी कोशिकाओं के केंद्रों में लगभग एक ही समय पर समान बदलाव दिखाई दिए। सामान्य स्थिति में कोशिकाओं के केंद्र अलग-अलग दिशा में रहते हैं, लेकिन बेहोशी की दवा के प्रभाव में वे एक जैसी अवस्था में आ गए। साथ ही डीएनए का सक्रिय हिस्सा भी एक साथ कोशिका केंद्र की बाहरी सतह की ओर खिसक गया। पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होने के बावजूद यह सामूहिक प्रतिक्रिया वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

आईआईटी मंडी के निदेशक ने ये कहा

भारतीय ज्ञान परंपरा में हमेशा यह माना गया है कि चेतना केवल मस्तिष्क तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक जीव में किसी न किसी रूप में विद्यमान रहती है। शोध में सभी कोशिकाओं में एक साथ हुए बदलाव इस विचार के काफी करीब दिखाई देते हैं। हालांकि इस विषय पर अभी और गहन अध्ययन की आवश्यकता है। -प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा, निदेशक, आईआईटी मंडी
 

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अब दूसरे जीवों पर भी होगा अध्ययन

शोधकर्ता अब सी. एलिगेंस नामक सूक्ष्म गोलकृमि पर भी इसी तरह का अध्ययन कर रहे हैं। यदि वहां भी कोशिकाओं में ऐसा ही समन्वित व्यवहार मिलता है तो चेतना और जीवित कोशिकाओं के संबंध को समझने में यह बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि साबित हो सकती है। यह शोध केवल पौधों के व्यवहार को समझने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इससे चेतना, जीव विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशने में मदद मिल सकती है।
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