प्रदेशभर में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने योजना तैयार की है। अब ग्लोबल हेल्थ ऑर्गनाइजेशन जपाइगो प्रोजेक्ट से गर्भवती महिलाओं की देखभाल की जाएगी। हालांकि, यह योजना शिमला और चंबा जिला में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू की है। इस दौरान एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का पता लगाएंगी। जोखिम के मामलों की जल्द पहचान कर सही प्रबंधन हो सकेगा। अगर जिलों में एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग को सफलता मिलती है तो पूरे प्रदेश में जपाइगो प्रोजेक्ट को लागू किया जाएगा।
पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण, प्राथमिक स्तर पर ही मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना लाना है। इसी के साथ बॉर्न हेल्दी प्रोजेक्ट में शिशुओं को जन्मजात बीमारियों से बचाना है। इसके लिए एएनएम और सीएचओ को प्रशिक्षित भी किया है ताकि समय पर बचाव किया जा सके। एएनएम और सीएचओ को गर्भवती महिलाओं में उच्च जोखिम जैसे एनीमिया, उच्च रक्तचाप, प्री-एकलम्पसिया, डायबिटीज की शुरुआती पहचान के बारे में जानकारी दी जा रही है। एआई-आधारित डिजिटल असेसमेंट मॉडल से जोखिम के अनुसार गर्भवती महिलाओं का सही वर्गीकरण करने के बाद रेफरल प्रोसेस तेज करना शामिल है।
इसी के साथ गर्भाधान से पूर्व देखभाल यानी महिलाओं को गर्भधारण से पहले ही स्वस्थ बनाने के लिए फोलिक एसिड की सही खुराक, पोषण परामर्श के बारे में ध्यान केंद्रित किया है। जन्म से ही बच्चों में दिखने वाले विकार क्लेफ्ट लिप, क्लब फुट, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की पहचान करना है। प्री-टर्म डिलीवरी को रोकने और जन्म के तुरंत बाद नवजात को री-ससिटेट करने व मदर केयर देने का व्यावहारिक अभ्यास के बारे में जानकारी देना है। प्रोजेक्ट में प्रसव के बाद धात्री माता और बच्चे का घर-घर जाकर सही समय पर फॉलोअप करना भी शामिल है ताकि स्वास्थ्य का पता लगाया जा सके। उधर, उप निदेशक कार्यक्रम डॉ. अल्पना ने बताया कि चंबा व शिमला में जपाइगो प्रोजेक्ट के तहत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का समय पर पता लगाकर प्रबंधन किया जा रहा है।