उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाए। कार्यक्रम स्थल पर सिक्कल सेल एनीमिया स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया गया, जहां प्रतिभागियों की स्वास्थ्य जांच की गई और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया। इससे पहले आयोग ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ जनजातीय क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। आयोग ने प्रदेश के सांसदों और विधायकों के साथ भी अलग से बैठक कर जनजातीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, आयोग के संयुक्त सचिव अमित निर्मल, निदेशक पुरेंदु कांत एवं पी कल्याण रेड्डी सहित प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों के सचिव और विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।
आयोग ने जनजातीय क्षेत्रों में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे पर विशेष बल दिया। आयोग अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि पात्र लाभार्थियों को अधिनियम के तहत मिलने वाले व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकारों का लाभ समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि देश के कई अन्य राज्यों के विपरीत हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में अब तक सिक्कल सेल एनीमिया का कोई मामला सामने नहीं आया है, जो स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता के लिहाज से सकारात्मक संकेत है।
समीक्षा बैठक से पहले आयोग ने युवा संसद कार्यक्रम के तहत जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं से संवाद किया। इस दौरान युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सशक्तिकरण और जनजातीय समाज के समग्र विकास से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। इसके बाद आयोग ने जनजातीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों, वन संरक्षण समितियों, वन अधिकार अधिनियम के लाभार्थियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ भी बैठक की। बैठक में जनजातीय समुदायों के अधिकारों, वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में हाटी, गुज्जर, गद्दी, किन्नौरा तथा अन्य जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित समस्याएं और सुझाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए। आयोग अध्यक्ष ने सभी प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि उनके सुझावों और मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि जनजातीय समुदायों को अधिकतम लाभ मिल सके।