नाथपा-झाकड़ी बिजली परियोजना जहां देश के कई राज्यों को रोशन कर रही है। वहीं, इस परियोजना के निर्माण के दौरान अपनी जमीन और घर खोने वाले आज भी अंधकार में हैं।
22 साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे प्रभावितों को न तो सरकार और न ही परियोजना प्रबंधन उनका हक दिला पाया है। वहीं, रही बात विपक्ष की तो उसे भी प्रभावितों में कोई रुचि नहीं है। शायद यही कारण है कि 27 दिन से प्रभावित अपनी मांगों को लेकर अनशन पर हैं।
उल्लेखनीय है कि नाथपा-झाकड़ी परियोजना के निर्माण के दौरान 480 परिवार विस्थापित हुए थे। इस दौरान प्रभावितों को जमीन, घर और नौकरी देने की बात कही गई थी, लेकिन 22 साल से इन लोगों को कुछ भी नहीं मिल पाया है। हालांकि वर्तमान में परियोजना एक दिन का 8 से 10 करोड़ का राजस्व कमा रही है।
इससे देश और प्रदेश की सरकारों को भी करोड़ों का राजस्व मिल रहा है। परंतु इससे विस्थापित हुए परिवारों को अपने हक के लिए पिछले 22 साल से दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। विस्थापित मजबूरन हक की लड़ाई के लिए 14 फरवरी 2014 से परियोजना के मुख्य द्वार पर क्रमिक अनशन पर बैठे हैं।
बुधवार को 27 वें दिन भी विस्थापितों की मांगों पर परियोजना प्रबंधन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। विस्थापित कल्याण समिति नाथपा-झाकड़ी के प्रधान विशाल मेहता का कहना है कि उनकी क्रमिक भूख हड़ताल 27 वें दिन में प्रवेश कर चुकी है।
बुधवार को अनशन पर मंगल दास, शिशी राम मेहता, मान सिंह, सब्बर सिंह नेगी और विनय सिंह लष्टी बैठे हैं।