चौहान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश में आज यह संदेश देने में सफल रही है कि वह प्रारंभ से ही इस मुद्दे पर पूरी तरह से गंभीर थी। केंद्र की भाजपा सरकार ने जानबूझकर इस मसले को लटकाए रखा। यहां तक सत्तासीन लोगों ने जनगणना की बात करने वालों को शहरी नक्सलवादी तक कह दिया। उन्होंने भाजपा नेताओं से प्रश्न किया कि यदि कांग्रेस पार्टी जातिगत जनगणना को लेकर शहरी नक्सलवाद की श्रेणी में थी तो क्या केंद्र में सत्तासीन लोग भी इसी श्रेणी में आएंगे।
नरेश चौहान ने कहा कि जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस पार्टी को किसी प्रकार का राजनीतिक लाभ लेने की मंशा नहीं थी अपितु पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की यह सोच थी कि देश के अंदर जो जनगणना है उसमें हर जाति के लोगों का एक डाटा देश के पास होना चाहिए। जातिगत जनगणना से देश का वास्तविक एवं समावेशी विकास सुनिश्चित होगा और दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों तथा शोषित लोगों को अन्य वर्ग के लोगों के बराबर लाने तथा उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने में सफलता मिलेगी। उन्होंने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि अब इस मामले में सरकार का क्या रोडमैप होगा। इसकी क्या समयसीमा होगी और इसके लिए बजट का क्या प्रावधान होगा। केवल बिहार के चुनावों को देखते हुए इस प्रकार का दांव खेलने और सुर्खियां बनाने के लिए केंद्र सरकार को इसका श्रेय लेने का कोई अधिकार नहीं है।