चंबा के अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले की सांस्कृतिक संध्याओं में स्थानीय कलाकारों की ओर से गाए जाने वाले कुंजड़ी मल्हार का अपना महत्व है। मिंजर मेले में कुंजड़ी मल्हार गाने की परंपरा है। यह गायन चंबा निवासी सुविख्यात गायक स्व. प्रेम सिंह की देन है। उनके बाद उन्हीं के परिवार के सदस्य अजीत भट्ट भी विरासत को सहेज रहे हैं। अजीत भट्ट ने बताया कि पारंपरिक और ऋतुकालीन लोकगीतों में प्रसिद्ध कुंजड़ी मल्हार, घुरेई, होरी और बसंत लोकगीतों के संग्रहण में काफी मेहनत की। 2014 में उन्हें ‘ट्रेडिशनल आर्टिस्ट ऑफ द ईयर’ के उपविजेता, 2015 में हिमाचलश्री श्रेष्ठ कलाकार के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
विरासत को संभालने के 32 साल में कई बदलाव आए। उनके कई पुराने साथी किन्हीं कारणों से जहां दूर हो गए तो कई नए साथी आ गए। उन्होंने 25 साथियों को अपने साथ जोड़ा है। वहीं, वर्ष 2014 में तत्कालीन उपायुक्त एम सुधा के आदेश के तहत निशुल्क तीन हजार स्कूली बच्चों को भी कुंजड़ी मल्हार लोक गीतों को सिखाया गया। वर्तमान समय में अजीत भट्ट के साथ कलाकार भीम राज वर्धन, तरुण वर्धन, भूपेंद्र अहीर, त्रिलोक सूर्या, सुनील चौहान, अंक भट्ट व रोहित कुमार काफी वर्षों से जुड़े हैं।