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Himachal News: हिमाचल में 18 माह में शातिरों ने ठगे 5.91 करोड़, 33 लाख रिकवर; जानें डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें

Sun, 03 Aug 2025 11:22 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2024 से जुलाई 2025 तक 18 महीनों में डिजिटल अरेस्ट के 12 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें 5.91 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। पढ़ें पूरी खबर...
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साइबर अपराध। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट कर लोगों से ठगी की जा रही है। साइबर अपराधी आम लोगों को वीडियो कॉल, फोन कॉल, सोशल मीडिया और ईमेल से डराकर ठग रहे हैं। इसमें अपराधी खुद को जज, पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताकर लोगों को झूठे मामलों में फंसा देने की धमकी देते हैं। इन मामलों में जागरूकता से ही बचा जा सकता है। वर्ष 2024 से जुलाई 2025 तक 18 महीनों में प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट के 12 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें 5.91 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। पुलिस ने 33 लाख की रिकवरी भी की है।

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साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन धर्मशाला के अधीन सबसे अधिक 6 मामले दर्ज हुए हैं। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन मंडी में 4 और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन शिमला में 2 केस दर्ज हुए हैं। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन शिमला में 26 दिसंबर 2024 को दर्ज मामले में सबसे अधिक 93,05,500 लाख रुपये की ठगी हुई। इसकी कोई रिकवरी नहीं हो पाई है। धर्मशाला में दर्ज एक मामले में 78,67,000 लाख रुपये की ठगी हुई। इसमें से 16,21,410 लाख रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। मंडी में 13 सितंबर 2024 को दर्ज मामले में 73,44,900 रुपये की ठगी हुई। इसमें से महज 3,559 रुपये ही रिकवर हो पाए हैं। 

साइबर ठग पीड़ितों को बताते हैं कि वे किसी गंभीर मामले (जैसे ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या बलात्कार) में फंसे हुए हैं। वे नकली पुलिस वर्दी, पहचान पत्र और ऑफिस का बैकग्राउंड दिखाकर वीडियो कॉल कर डिजिटल अरेस्ट करते हैं। डर और शर्मिंदगी का फायदा उठाकर उनसे पैसे ऐंठते हैं। 
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डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें
1. अनजान नंबर से आई कॉल का जवाब न दें।
2. डर के कारण किसी को भी पैसे न भेजें।
3. तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें। 1930 पर साइबर हेल्पलाइन को रिपोर्ट करें।
4. अपने परिवार और खासकर बुजुर्गों को जागरूक करें।
5. कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। यह पूरी तरह से एक साइबर धोखाधड़ी है। सतर्क रहें, जागरूक बनें और दूसरों को भी सतर्क करें। - दिनेश कुमार शर्मा, एसपी, साइबर क्राइम
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