तिब्बत मसले को हल करने के लिए मध्य मार्ग नीति ही एकमात्र ऐसा माध्यम है, जो तिब्बत और चीन दोनों देशों के लोगों के लिए फायदेमंद रहेगा। यह बात 14वें तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने मैक्लोडगंज स्थित अपने निवास स्थान पर मध्य मार्ग नीति को लेकर आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान कही।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिनिधियों के साथ बैठक में बोले धर्मगुरु
दलाईलामा ने कहा ‘मध्य मार्ग एक यथार्थवादी दृष्टिकोण है। इस नीति के तहत बातचीत के जरिये ही तिब्बत मसले को सुलझाया जा सकता है। हमने कभी भी तिब्बत को बांटने और उसको आजाद करने की मांग नहीं की।’ धर्मगुरु ने कहा कि वह हमेशा तिब्बत मसले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के पक्षधर रहे हैं। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. लोबसंग सांग्ये मध्य मार्ग नीति से तिब्बत मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कभी भी तिब्बत को बांटने और आजाद करने की मांग नहीं की
उन्होंने कहा कि चीन के प्रतिनिधियों के साथ तिब्बत मुद्दे को लेकर कई बार चर्चा हुई, लेकिन कोई हल नही निकल पाने के चलते 1974 में हमने ‘मिडल वे-अप्रोच’ को अपनाया। धर्मगुरू ने कहा कि ‘मिडल वे-अप्रोच’ को पूरे विश्व में समर्थन मिला है। इनमें चीनी लेखक, पत्रकार, शोधार्थी और आम लोग भी शामिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मुलाकात के बाद ‘मिडल वे-अप्रोच’ के समर्थन में बयान भी जारी किया था। इसके बाद चीन के प्रतिनिधिमंडल ने दौरा किया था। उसने पाया कि तिब्बती समुदाय में इस मुद्दे को लेकर एकजुटता है।