लेखिका, समाजसेविका और मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. श्वेता मिश्रा
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जीवन की सबसे बड़ी जीत किसी परीक्षा में नहीं, बल्कि इंसान के भीतर के मूल्यों और संवेदना में होती है। यह कहना था प्रसिद्ध लेखिका, समाजसेविका और मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. श्वेता मिश्रा का। वह अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में बच्चों में नया जोश भर गईं। आमतौर पर जहां ऐसे कार्यक्रमों की शुरुआत उपलब्धियों की गिनती से होती है, वहीं यहां पहले जीवन की गुणवत्ता पर चर्चा हुई।
डॉ. मिश्रा का संबोधन सिर्फ प्रेरणादायक नहीं, बल्कि जीवन के मूल उद्देश्यों को छू जाने वाला रहा। कहा कि आज की दुनिया को सिर्फ सफल नहीं, संवेदनशील और शांतिप्रिय नागरिकों की जरूरत है, जो न सिर्फ खुद के लिए, बल्कि समाज और प्रकृति के लिए भी सोचें। उन्होंने जीवन के संघर्षों को स्वीकार करने और हार को भी गरिमा से अपनाने की बात कही। उनके अनुसार, सृजनशीलता ही इंसान को मशीन बनने से बचाती है और वही समाज को आगे बढ़ाती है।
इस मौके पर उन्होंने बच्चों से यह भी आग्रह किया कि वह अपने घर, गली, शहर और प्रदेश से शुरू होकर दुनिया में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनें। उन्होंने कहा कि अंकपत्र से परे भी एक विशाल, सार्थक और सुंदर जीवन है। समारोह की इस अद्भुत शुरुआत ने संपूर्ण आयोजन को एक गहराई और गरिमा प्रदान की, जिसे श्रोताओं ने तालियों से नहीं, मन की शांति से महसूस किया।