मंडी। शिमला, बिलासपुर और मंडी के बाद अब करसोग की महिलाएं भी चीड़ की पत्तियों से वस्तुएं तैयार करेंगी। इससे रोटी बाॅक्स, राखी, झुमके, गुड़िया आदि बनाई जाएंगी। मेड इन हिमाचल से इन विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की ऑनलाइन बिक्री होगी। प्रदेश में आयोजित होने वाले मेलों में भी इन वस्तुओं की बिक्री के लिए स्टाल लगेंगे। चीड़ की पत्तियों से उत्पादों का निर्माण करने से न केवल महिलाओं की आर्थिकी मजबूत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी यह कार्य अहम योगदान देगा।
करसोग वन प्रभाग के पथरेवी में चार से 14 नवंबर तक 20 महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से हस्तशिल्प बनाने का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य बदलते जलवायु के कारण आ रही चुनौतियों का सामना करने और ग्रामीण आजीविका में विविधता लाने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना रहा। प्रशिक्षण इंडो-जर्मन तकनीकी सहयोग परियोजना सस्टेनेबल मैनेजमेंट ऑफ फाॅरेस्ट ईको सिस्टम सर्विसेज के तहत आयोजित किया गया। पथरेवी क्षेत्र में चीड़ की सूखी पत्तियों की अधिकता के कारण जंगल में आग लगने का खतरा बना रहता है।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से दर्पण, राखी, रोटी बाॅक्स और विभिन्न प्रकार के आभूषण बनाने की कला में निपुण बनाया गया। प्रशिक्षण में प्रसंस्करण, कच्चे माल की खरीद, पैकेजिंग और गांव के सुदूर स्थान को ध्यान में रखते हुए रसद व्यवस्था जैसे विषयों को भी शामिल किया गया। वीरवार को समापन समारोह में वन मंडलाधिकारी कृष्ण भाग नेगी ने भाग लिया। इस अवसर पर जर्मन डेवलपमेंट को ऑपरेशन के सलाहकार सत्यन चौहान भी उपस्थित रहे। दोनों ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और उन्हें प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किए।
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