जोगिंद्रनगर में शानन प्रोजेक्ट के निर्माण में बिछाई गई रेल पटरी का मिटने लगा अस्तित्व
पटरियों के अवशेष भी धीरे-धीरे खत्म हो रहे
रेलवे के हेरिटेज विभाग से पत्राचार किया जाएगा : भूपेंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर में एशिया के पहले शानन प्रोजेक्ट के निर्माण से जुड़ी ऐतिहासिक रेल पटरी का अस्तित्व अब मिटने के कगार पर पहुंच गया है। पिछले तीन दशकों से रेल सेवा ठप होने के कारण इस ऐतिहासिक मार्ग पर अब चौपहिया वाहन दौड़ते नजर आते हैं। रेलवे स्टेशन से शानन प्रोजेक्ट तक बिछाई गई लगभग एक किलोमीटर लंबी रेललाइन का नामोनिशान मिटता जा रहा है, जिससे रेलवे विभाग की उदासीनता भी सामने आ रही है।
कभी शानन प्रोजेक्ट के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाली यह रेललाइन जोगिंद्रनगर की पहचान और आकर्षण का प्रमुख केंद्र हुआ करती थी। रेल सेवाएं बंद होने के बाद अब इसकी पटरियों के अवशेष भी धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। कई स्थानों पर रेल पटरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर बिखर चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के प्रति रेलवे का हेरिटेज विभाग गंभीर नहीं दिख रहा है, जिसके चलते अब इसके अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। इसी कारण स्थानीय नागरिकों ने इसके संरक्षण की मांग को लेकर आवाज बुलंद की है।
स्थानीय निवासी रामलाल, विनय, मनोज एवं अन्य ने बताया कि पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक करीब 150 किलोमीटर लंबी रेललाइन का निर्माण 1924 के दशक में ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बैटी की ओर से कराया गया था। इसी रेलमार्ग के माध्यम से एशिया के पहले विद्युत प्रोजेक्ट शानन के निर्माण के लिए मशीनरी पहुंचाई गई थी, जो उस समय एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। बीते तीन दशकों से इस रेल पटरी पर कोई ट्रेन नहीं चली है और अब इसके ऐतिहासिक अवशेष भी समाप्त होने की ओर हैं।
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शानन प्रोजेक्ट के निर्माण से जुड़ी यह रेल पटरी ऐतिहासिक महत्व रखती है, लेकिन वर्तमान में इसके अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया है। यह मामला ध्यान में लाया गया है। ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए रेलवे के हेरिटेज विभाग से पत्राचार किया जाएगा। साथ ही परियोजना के उच्चाधिकारियों से भी राय लेकर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। -भूपेंद्र सिंह, एसई, शानन प्रोजेक्ट, जोगिंद्रनगर