जोगिंद्रनगर (मंडी)। सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा अधिकृत निजी क्रस्ना लैब में विटामिन बी, डी, थाइराइड, एनटीटीओ, एनटीसीसीटी से संबंधित कुल 20 प्रकार के टेस्ट के लिए सैंपल लेना अचानक बंद कर दिए गए हैं। इससे गंभीर मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। मंडी जिला समेत प्रदेश व्यापी चिकित्सकों की हड़ताल के बीच अचानक बंद हुए इन टेस्टों से अब उपचार भी प्रभावित होगा। मरीजों को टेस्ट के लिए निजी लैब में अधिक दाम चुकाने होंगें।
जोगिंद्रनगर, सरकाघाट के अलावा अन्य अस्पतालों में स्थापित क्रस्ना लैब से मरीजों के खून के सैंपल एकत्रित कर नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज और चंडीगढ़ में भी परीक्षण के लिए भेजे जाते हैं। अकेले जोगिंद्रनगर में ही करीब डेढ़ सौ मरीजों के एक हजार टेस्ट निजी क्रस्ना लैब में होते हैं। मरीजों के लिए सबसे बड़ी राहत यह थी कि सरकार द्वारा अधिकृत निजी प्रयोगशाला में विटामिन डी, बी और थाइराइड की बीमारियों के टेस्ट सरकारी दामों में हो जाते थे।
मगर अब इसके लिए मरीजों को दोगुना शुल्क भी चुकाना होगा। बुधवार को नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर की क्रस्ना लैब में यह टेस्ट के लिए पहुंचे कई मरीजों को लौटा दिया गया। इसका एक कारण टेस्ट की रिपोर्ट में देरी भी बताया गया। सूत्र बताते हैं कि क्रस्ना लैब प्रबंधन के लंबित भुगतान के चलते फिलहाल कुछ आवश्यक टेस्टों पर रोक लगा दी है। हालांकि निशुल्क 110 प्रकार के टेस्ट क्रस्ना लैब में अभी भी हो रहे हैं। बता दें कि अस्पताल की सरकारी प्रयोगशाला में 12 बजे के बाद टेस्ट सुविधा नहीं मिलती है।
उधर, क्रस्ना लैब जोगिंद्रनगर की प्रभारी सरिता ठाकुर ने बताया कि 110 प्रकार के निशुल्क टेस्ट क्रस्ना लैब में हो रहे हैं। जिन टेस्टों की रिपोर्ट नेरचौक और चंडीगढ़ की प्रयोगशालाओं से आती है, उनके सैंपल नहीं लिए जा सके। बताया कि रिपोर्ट में देरी आने के कारण भी मरीजों को इन टेस्टों को अपने स्तर पर करवाने का आग्रह किया गया।