जोगिंद्रनगर (मंडी)। सूबे के कॉलेजों में नई शिक्षा नीति के तहत औषधीय पौधों पर क्रेडिट कोर्स भी शुरू होंगे। आयुर्वेद का महत्व से विद्यार्थियों को अवगत करवाने के लिए आयुष मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय आरसीएफसी एनआर-एक जोगिंद्रनगर ने इसके लिए कॉलेजों एमओयू करना शुरू कर दिया है। इसकी शुरूआत बुधवार से जोगिंद्रनगर कॉलेज से हो गई है।
मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर के अलावा औषधीय पौधों के लिए जलवायु पर आधारित क्षेत्रों के कॉलेजों में औषधीय पौधों पर क्रेडिट कोर्स की सुविधा से हजारों विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के कॉलेज के विद्यार्थियों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड अनुसंधान संस्थान भारतीय चिकित्सा पद्धति (आरआईआईएसएम) आरसीएफसी एनआर-एक स्थित जोगिंद्रनगर के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अरुण चंदन ने बताया कि बोर्ड के माध्यम से कॉलेज में औषधीय पौधों पर आधारित क्रेडिट बेस कोर्स भी शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
जोगिंद्रनगर कॉलेज की प्राचार्य प्रो. सुनीता सिंह ने बताया कि कॉलेज और आरसीएफसी जोगिंद्रनगर मिलकर औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और स्टार्टअप्स को नई शिक्षा नीति में एकीकृत करने पर कार्य करेंगे। कॉलेज परिसर में रोपे गए औषधीय पौधों की देखभाल कॉलेज के विद्यार्थी स्वयं करेंगे। भविष्य में कॉलेज औषधीय पौधों, आयुष एवं आयुर्वेदिक आहार पर राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के आरसीएफसी एनआर-एक के सहयोग से आईडिया हैकाथॉन का आयोजन भी करेगा।
एमओयू करने से पूर्व कॉलेज परिसर में औषधीय पौधा भी लगाया गया। विद्यार्थियों को औषधीय पौधों का वितरण भी किया गया ताकि वे अपने घरों में इन पौधों का रोपण कर सकें। इस अवसर पर प्रो. स्मृति ठाकुर ने औषधीय पौधों की उपयोगिता एवं महत्व बारे विस्तृत जानकारी दी।