शहर के लिए ऊहल नदी पेयजल योजना स्वचालित प्रणाली पर आधारित होगी। इससे सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग पर विद्युत बिल के खर्चे से मुक्ति मिलेगी। इससे पानी की गुणवत्ता एवं वितरण प्रणाली प्रभावशाली ढंग से नियंत्रित होगी। मंडी शहर के लिए उक्त पेयजल योजना पर करीब 82.18 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पेयजल योजना के लिए करीब 76.39 करोड़ का टेंडर आवंटित कर दिया गया है।
पेयजल योजना का काम भी शुरू हो गया है। वर्ष 2017 तक मंडी शहर में ऊहल नदी का पानी लोगों के घरों तक पहुंचेगा। योजना की प्रशासनिक स्वीकृति 9/2014 में प्रधान सचिव शहरी विकास द्वारा प्रदान की गई। योजना से वर्ष 2046 तक की 53,155 व्यक्तियों को 15.16 एमएलडी पानी उपलब्ध करवाया जाएगा। ऊहल नदी से करीब तीस किलोमीटर लंबी पाइप लाइन द्वारा पानी शहर में लाया जाएगा।
मंडी शहर के अतिरिक्त नगर नियोजन के अधीन आने वाले क्षेत्रों छिपणु, बिजणी, भ्यूली, नेला, चडयारा, सन्यारडी, पंजेठी, चडयाणा, तल्याहड़, मडवाहन और बाड़ी को भी इस योजना में शामिल किया गया है। योजना के चालू होने पर वर्तमान विद्युत की खपत पर होने वाले व्यय की प्रतिवर्ष लगभग पौने दो करोड़ रुपये की बचत होगी। योजना जल स्त्रोत से भंडारण टैंक तक पूर्ण रूप से स्वचालित होगी। योजना के तहत दो आधुनिक जलशोधन संयंत्रों को कांगणीधार एवं ढांगसीधार में बनाने का प्रस्ताव है। इधर, आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता राजकुमार सैणी ने बताया कि योजना के तहत मंडी व आसपास क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वचालित प्रणाली पर आधारित होगी। जिससे हर वर्ष करीब पौने दो करोड़ रुपये की बचत होगी। उन्होंने बताया कि योजना के लिए काम शुरू कर दिया गया है।