मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के कमांद परिसर में पर्वतीय क्षेत्रों की सड़कों के रखरखाव पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का वीरवार को शुभारंभ हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े इंजीनियर, परियोजना क्रियान्वयन इकाइयां और एआरआरडीए के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए उपायुक्त अपूर्व देवगन ने प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विशेषकर पर्वतीय एवं आपदा संभावित क्षेत्रों में सड़कों के विकास और रखरखाव से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सभी हितधारकों को तैयार करना है। जिला मंडी सहित हिमाचल प्रदेश का अधिकांश हिस्सा दुर्गम क्षेत्र में आता है, जहां सड़कें ही परिवहन का मुख्य साधन हैं। प्राकृतिक आपदाओं से सड़कें क्षतिग्रस्त होती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होता है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के दिशानिर्देशों और हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों के मौसम के अनुरूप डिजाइन तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। डीपीआर तैयार करने, एनडीएमए गाइडलाइन के अनुसार तकनीकी घटकों की समझ बढ़ाने और सड़क निर्माण में सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा आपदा उपरांत सर्वेक्षण, जल निकासी की व्यवस्था, छोटे पुल और कल्वर्ट के रखरखाव पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की महत्ता और संस्थान के विविध क्षेत्रों में योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के संयोजक, स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग के डॉ. आशुतोष कुमार ने सभी का स्वागत किया और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। स्कूल के चेयरपर्सन डॉ. रजनीश शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए।