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देवी-देवताओं के दर्शन को उमड़ा आस्था का सैलाब

Sat, 02 Apr 2016 06:45 PM IST
मंडी।
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जोगिंद्रनगर देव मेला में शनिवार को देवताओं के दर्शन को उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। लघु शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध जोगिंद्रनगर मेले के देव समागम में आए देवी-देवताओं के दर्शन के लिए शनिवार को लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। चौहारघाटी के आराध्य देव हुरंग नारायण के प्रति लोगों की गहरी आस्था है।
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चौहारघाटी के देव हुरंग नारायण के प्रति मेले में लोगों की श्रद्धा और आस्था देखते ही बनती है। दिन भर उनके दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। देव हुरंग नारायण से घाटी की विकट भौगोलिक परिस्थितियों के चलते कई लोक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। हुरंग गांव में देवता के मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है और यहां छुआछूत तथा अन्य सामाजिक अपराध की सजा देने की प्रथा भी प्रचलित है।

घाटी में प्रचलित जनश्रुति के अनुसार देव हुरंग नारायण की उत्पत्ति भी अपने आप में एक रोचक प्रसंग से जुड़ी है। कहा जाता है कि जोगिंद्रनगर से करीब 35 किलोमीटर दूर नारला के टामूण गांव में एक आठ-दस वर्षीय बालक बैठा था। आने-जाने वाले लोग जब उससे पूछते तो वह अपना नाम नारायण बताता था। एक व्यक्ति ने जब उससे पूछा कि तुम यहां रहना चाहते हो तो उसने हामी भर दी। इस पर बालक नारायण को गांव वालों के पशु चराने का काम सौंप दिया। नारायण गांव वालों के पशुओं को दूर पहाड़ों पर चराने ले जाता था। इन पहाड़ों में मवेशियों को पानी पिलाने के लिए जल का कोई स्त्रोत नहीं था।
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इस स्थिति में बालक नारायण अपनी छड़ी से जमीन को खोदता तो वहां पानी निकल आता और फिर पशुओं को पानी पिलाने के बाद वह जल स्त्रोत को मिट्टी से बंद कर देता। गांव वालों ने नारायण से इस बाबत पूछा तो उसने सब कुछ सच-सच बता दिया। यह सुन कर ग्रामीण हैरान हो गए। उन्हें लगा कि नारायण झूठ बोल रहा है, वह कोई बात ग्रामीणों से छिपा रहा है। एक दिन गांव के लोगों ने चुपचाप नारायण का पीछा किया, लेकिन उसे इसकी भनक लग गई। नारायण ने अपनी छड़ी से जमीन खोदी और पानी निकल आया। इसी बीच चमत्कारी बालक नारायण पलभर में मौके से गायब हो गया। बाद में इस स्थान को हिमरी गंगा के नाम से जाना जाने लगा और आज भी वहां पर लगातार पानी निकल रहा है तथा हर वर्ष 20 भादों को यहां पर पवित्र स्नान का आयोजन भी किया जाता है। जोगिंद्रनगर देव मेले में देव पशाकोट के अलावा इस बार करीब 70 से अधिक देवी-देवता मेले की शोभा बढ़ाने के लिए पहुंचे हैं।
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