शिकारी देवी सड़क से बर्फ हटाती मशीनरी। स्रोत- विभाग
थुनाग (मंडी)। जिला मंडी के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ शिकारी देवी मंदिर के कपाट चैत्र नवरात्र पर 30 मार्च को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। नवंबर 2024 में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए थे। मगर अब मौसम अनुकूल होने पर मंदिर प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
लोक निर्माण विभाग ने जंजैहली से शिकारी देवी सड़क पर बर्फ हटाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। रायगढ़ से मंदिर तक के छह किलोमीटर मार्ग की सफाई का कार्य शनिवार शाम तक पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालु आसानी से शिकारी देवी मंदिर तक पहुंच सकेंगे। मंदिर कमेटी और स्थानीय प्रशासन नवरात्रों के आयोजन की तैयारियों में जुट गए हैं।
अब चार महीने बाद मौसम के अनुकूल होने पर प्रशासन ने कपाट खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। पुजारियों की तैनाती, सुरक्षा प्रबंध और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस बार मंदिर परिसर और आसपास की बर्फ श्रद्धालुओं के लिए रोमांचक अनुभव लेकर आएगी। घने देवदार के जंगलों से घिरा यह स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
लोक निर्माण विभाग सराज मंडल के अधिशाषी अभियंता रोशन लाल ने बताया कि शनिवार शाम तक सड़क से बर्फ हटाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। वहीं, मंदिर कमेटी के चेयरमैन और थुनाग के एसडीएम लक्ष्मण कनेट ने बताया कि 30 मार्च से शुरू होने वाले नवरात्र 7 अप्रैल को राम नवमी के साथ संपन्न होंगे।
बिना अनुमति नहीं लगेंगे लंगर
गोहर (मंडी)। माता शिकारी मंदिर परिसर में बिना अनुमति लंगर या भंडारा लगाना अब संभव नहीं होगा। इसके लिए श्रद्धालुओं को मंदिर कमेटी एवं एसडीएम कार्यालय से पूर्व स्वीकृति लेनी होगी। एसडीएम लक्ष्मण कनेट ने बताया कि इच्छुक श्रद्धालु दूरभाष नंबर 01907-257666 पर संपर्क कर या ईमेल (sdmmanjnlgmail.com) के माध्यम से आवेदन भेज सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति लंगर या भंडारा लगाते पाए जाने पर माता शिकारी कमेटी द्वारा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।