मंडी। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में चार साल से कैंटीन बंद होने के कारण मरीजों और तीमारदारों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। गर्म पानी, दूध और सस्ता भोजन लेने के लिए परिजन अस्पताल परिसर से बाहर बाजार पर निर्भर हैं। टेंडर प्रक्रिया लंबित होने की वजह से अस्पताल में अब तक कैंटीन शुरू नहीं हो सकी है।
अस्पताल परिसर के मुख्य गेट के समीप रात्रि 12 बजे तक चाय की दुकान खुली रहती है, जहां मरीजों और बच्चों के लिए खाद्य सामग्री, जल पान की सुविधा रहती है। देर रात जरूरत पड़ने पर तीमारदारों को सुविधा नहीं मिल रही। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीजों को सुबह का नाश्ता, लंच और डिनर की व्यवस्था रहती है, लेकिन तीमारदारों के लिए सुविधा न होने से उन्हें अस्पताल के बाहर से ही महंगे दाम पर जल-पान और खाद्य सामग्री लेनी पड़ रही है।
अस्पताल परिसर में कैंटीन सुविधा होने से लोगों को सस्ते दामों पर नाश्ता, दोपहर और रात्रि भोजन की सुविधा मिलेगी। क्षेत्रीय और एमसीएच के 300 बिस्तर वाले अस्पताल में रोजाना 1200 से अधिक ओपीडी रहती है। दुकानों में गर्म पानी करवाने पर तीमारदारों को 10 रुपये बोतल, 12 रुपये में चाय, गर्म दूध 15 से 20 रुपये गिलास दिया जा रहा है। तीमारदारों को 80 रुपये से सौ रुपये तक खाना दिया जा रहा है। अस्पताल में कैंटीन होने से मरीजों को ये सेवाएं सस्ती मिलेंगी।
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अस्पताल परिसर में चल रहे लंगर की वजह से कैंटीन लेने में कोई रुचि नहीं दिखा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने दो-चार कारोबारियों से बात भी की है। कारोबारियों का कहना है कि मरीजों के तीमारदारों से लेकर आम जनता लंगर में जा रही है। ऐसे में यदि कैंटीन का टेंडर होता है तो उन्हें नुकसान होगा। फिर भी अस्पताल प्रबंधन इस बारे प्रयासरत है।
-डॉ. दीपाली शर्मा, सीएमओ मंडी
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