सराज घाटी के उप तहसील छतरी के बरयोगी गांव में बर्फबारी के बीच ठिठुरते बेजुवान। संवाद
थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र में बर्फबारी और कड़ाके की ठंड ने बेजुबान लावारिस पशुओं की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। जंगलों में चारा बर्फ की चादर में ढक गया है। इससे लावारिस मवेशी गांवों, रिहायशी इलाकों और सड़कों पर आ गए हैं। जंजैहली, संगलबाड़ा, थुनाग, चिऊणी, बागाचनोगी और आसपास के इलाकों में इनकी संख्या बढ़ गई है।
ये जानवर सड़कों पर ठंड में कांपते हुए घूम रहे हैं। भूख-प्यास से कमजोर हो गए हैं। कुछ की मौत भी हो गई है। गीली सड़कों और बर्फ से ढके रास्तों पर भोजन तलाशना उनके लिए लगभग असंभव हो गया है। कुछ टैग वाले पालतू पशु भी लावारिस नजर आ रहे हैं।
स्थानीय निवासी और समाजसेवी इन पशुओं को सुरक्षित जगह पहुंचा रहे हैं। चारा-पानी भी उपलब्ध करवा रहे हैं। देव कमरुनाग गोसदन के सदस्य देवी सिंह ने बताया कि 20 सदस्यीय टीम दिन-रात सेवा में जुटी है। खनुखली हेलीपैड के पास बने गोसदन में 30 और जंजैहली अस्पताल के समीप इतने ही पशुओं को चारा पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। रविवार को जीप से घास लाकर वितरित की गई। खनुखली हेलीपैड के पास 300 पशुओं की क्षमता वाला गोसदन बना है, लेकिन चारे की कमी के कारण वहां महज दो दर्जन पशु ही रख पाए गए हैं। एसडीएम थुनाग संजीत शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा, यह समस्या संज्ञान में है। पंचायतों के सहयोग से चारा मुहैया करवाने और पशुओं को सुरक्षित जगह पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही दीर्घकालीन ठोस कदम उठाए जाएंगे।संवाद