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कातिलाना हमला और लूटपाट के दोषियों को सात साल का कारावास

Wed, 30 Nov 2016 09:53 PM IST
मंडी
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मंडी। कातिलाना हमला और लूटपाट के दो दोषियों को अदालत ने सात साल के कठोर कारावास और तीस-तीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपियों के जुर्माना राशि को निश्चित समय में अदा न करने पर उन्हें छह-छह माह की अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (दो) कृष्ण कुमार के न्यायालय ने पंजाब के पटियाला जिला के राजपुरा निवासी सतनाम सिंह उर्फ टिंकू और दीप्ति सिंह के खिलाफ भादंसं की धारा 307, 397, 395 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25,54 व 59 के तहत अभियोग साबित होने पर क्रमश: सात साल, पांच-पांच साल और तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों को उक्त धाराओं के तहत क्रमश: दस-दस हजार और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना भी अदा करना होगा। समय पर जुर्माना राशि अदा न करने की सूरत में उन्हें सभी अपराधों के तहत छह-छह माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस मामले में भगौड़ा घोषित कर दिए गए अन्य आरोपियों जगजीत सिंह, बलविंद्र और पवन कुमार के खिलाफ उन्हें गिरफ्तार करने के बाद अभियोग चलाया जाएगा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार ग्राम पंचायत रंधाडा की प्रधान सीता देवी ने पुलिस को सूचना दी थी कि कुछ लोगों ने दो लोगों पर हमला करके उन्हें घायल कर दिया है। पुलिस ने अस्पताल में पहुंच कर घायल कृष्ण कुमार का बयान दर्ज किया। उसका कहना था कि वह 17 मई 2009 को अपनी कार पर रंधाडा जाने के लिए बस स्टैंड के पास मौजूद था। जहां पर चार-पांच लोग उसके पास आए और कार को रिवालसर ले जाने को कहा। रात करीब 1.30 बजे वह अपने रिश्तेदार को रंधाडा से शिमला ले जाने के लिए जा रहा था। इसी दौरान उक्त लोग उसे फिर से जेल रोड के पास सड़क के बीचों बीच खड़े हुए मिले। उन लोगों ने उससे रिवालसर मार्ग पर स्थित रंधाडा तक ले जाने की प्रार्थना की। जिस पर कृष्ण ने उन्हें कार में बिठा लिया। रंधाडा पहुंचने पर उक्त आरोपी ने उसे कुछ और आगे तक ले जाने को कहा। करीब 2.30 बजे वह गजनोहा के पास बैठे थे तो आरोपियों ने उसकी पीठ पर धारदार हथियार से प्रहार किया। जब उसने कार से निकल कर शोर मचाया तो वहां पर हवाणी निवासी रमेश कुमार और हेम सिंह पहुंचे। रमेश कुमार ने जब कृष्ण को बचाने की कोशिश की तो एक आरोपी ने उसके पेट में चाकू घोंप दिया। पुलिस ने मामला दर्ज करके आरोपियों की धरपकड़ के बाद उनके खिलाफ अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए लोक अभियोजक अनुज शर्मा ने 19 गवाहों के बयान कलमबंद करवा कर आरोपियों के खिलाफ अभियोग साबित किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपियों के खिलाफ कातिलाना हमला और लूटमार करने व शस्त्र अधिनियम के तहत संदेह की छाया से दूर अभियोग साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपियों को उक्त सजा का फैसला सुनाया है।
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