करसोग (मंडी)। एक दशक तक सतलुज के गर्भ में डूबी सरौर शिव गुफा अब फिर दुनिया के सामने है। कोल बांध बनने के बाद जलसमाधि में चली गई इस ऐतिहासिक धार्मिक धरोहर का शीत ऋतु में जलस्तर घटने पर तत्तापानी के समाजसेवी प्रेम रैना ने स्टीमर से पहुंच बनाकर पुनः अनावरण कराया। श्रद्धालुओं में गुफा के दर्शन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
सरौर शिव गुफा सतलुज घाटी के अंतर्गत पूर्ववर्ती सुकेत रियासत की एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है। तत्तापानी क्षेत्र को ऋषि जमदग्नि की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है, जहां से सतलुज घाटी में आर्य संस्कृति के प्रवर्तन की मान्यता है। तत्तापानी से लगभग दो किलोमीटर पश्चिम तत्तापानी-बैहली मार्ग पर पांगणा सरिता और सतलुज नदी के संगम स्थल सरौर में स्थित यह गुफा 108 स्वयंभू शिवलिंगों के लिए प्रसिद्ध रही है।
साहित्यकार और इतिहासकार डाॅ. हिमेंद्र बाली के अनुसार सरौर गुफा का संबंध महाभारत काल की लाक्षागृह घटना से जोड़ा जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसी पांगणा सरिता के तटीय मार्ग से भगवान परशुराम भी घाड़ी, झंडयारा, पांगणा, शिकारीदेवी, काओ, ममेल, छकाणा, खेगसू, नीरथ और दत्तनगर होते हुए निरमंड पहुंचे थे।
सरौर शिव गुफा में सैकड़ों प्राकृतिक शिवलिंग, शंख और अन्य आकर्षक आकृतियां हैं। गुफा की खोज 1990 के दशक में तत्तापानी पर्यटन विभाग के तत्कालीन प्रबंधक अमर दत्त शर्मा ने की थी। इसके बाद यहां प्राकृतिक रूप से प्रतिष्ठित 108 शिवलिंगों की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई थी। गुफा के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और लोक निर्माण मंत्री जय बिहारी लाल खाची ने आर्थिक सहायता भी प्रदान की थी। इस वर्ष शीत ऋतु में जलस्तर कम होने पर प्रेम रैना ने स्थानीय नाविकों की सहायता से स्टीमर से गुफा तक सुरक्षित पहुंच बनाकर इसके दर्शन पुनः संभव कराए। उनकी इस पहल से सरौर शिव गुफा एक बार फिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गई है। प्रेम रैना ने कहा कि सरौर शिव गुफा हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अमूल्य हिस्सा है।
संस्कृति मर्मज्ञ डाॅ. जगदीश शर्मा का कहना है कि सरौर शिव गुफा का पुनः प्रकाश में आना इस बात का सशक्त उदाहरण है कि सामाजिक सक्रियता और पर्यटन जागरूकता मिलकर ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित कर सकती है।
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सरौर शिव गुफा पहुंचे प्रेम रैना। स्त्रोत- जागरूक पाठक