निगम के कर्मियों पर ही शहर को सुंदर रखने का जिम्मा
डोर-टू-डोर कचरा उठाएं या झाड़ियों की सफाई करें
अभियान दो...
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। शहर में सफाई स्वच्छता पखवाड़े पर ही सीमित रह गई है। बेशक नगर निगम के सख्त रवैये से पहले की तुलना में कचरा शहर में कम हुआ है, लेकिन कई सरकारी कार्यालयों के परिसर में उगी झाड़ियां और उनमें पड़ी गंदगी स्वच्छता के प्रति उनकी जिम्मेदारी का अहसास करवा रही हैं।
बस अड्डा मंडी, वल्लभ डिग्री कॉलेज, जोनल अस्पताल मंडी परिसर समेत कई सरकारी कार्यालयों के परिसर के आसपास इन दिनों उगी झाड़ियां जंगल बन रही हैं। इनकी सफाई के लिए उक्त कार्यालय अब स्वच्छता पखवाड़े पर निर्भर हैं। शहर को गंदा रखने में कुछ लोग भी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट रहे हैं। सुबह निगम के कर्मियों को कूड़ा न देकर बाद में सड़क किनारे रख रहे हैं। पशु और कुत्ते इस पर मुंह मारकर बाद में इसे फैला रहे हैं। कई लोग खड्डों में कूड़ा फेंक रहे हैं। कई दुकानदार भी डस्टबिन न रखकर लोगों को खाद्य पदार्थों के रैपर खुले में फेंकने पर मजबूर कर रहे हैं। कई पार्कों के पास भी झाड़ियां उग गई हैं।
निगम में सफाई का जिम्मा संभाल रहे सफाई कर्मचारी बताते हैं कि अभी भी 10 फीसदी लोग नियमों को तोड़कर बाद में कूड़े को इधर-उधर ठिकाने लगा रहे हैं। इससे नालियां ब्लॉक हो रही हैं। बारिश पर गंदगी पसर रही है। बता दें कि 2023-24 में आए स्वच्छता सर्वेक्षण में डोर-टू-डोर कचरा उठाने पर निगम को 100 में से 92 फीसदी अंक मिले थे।
क्या बोलते शहरवासी
-पर्यावरण प्रेमी व डाक विभाग से सेवानिवृत्त कृष्णा ठाकुर बताती हैं कि जब तक लोग जिम्मेदारी को नहीं समझेंगे तब तक ऐसे ही हालात बने रहेंगे। लोग निगम कर्मियों को कूड़ा न देकर बाद में पेड़ों के किनारे कूड़ा फेंककर शहर को गंदा कर रहे हैं।
-नागरिक सभा के प्रधान ओपी कूपर ने बताया कि शहर को स्वच्छ बनाने में जनता को भी सहयोग देना चाहिए। जो कूड़ा उनके वार्ड में गिरा रहा है, उसकी फोटो खींचकर निगम के अधिकारियों से शिकायत करनी चाहिए। पार्षदों को भी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
बॉक्स
निगम नियमों का पालन करवाए तो सुधर सकते हैं हालात
वार्डों में स्वच्छता को लेकर वार्ड कमेटी बनाने का प्रावधान है। अगर कमेटी में 15 से 20 वरिष्ठ नागरिक होंगे तो स्वभाविक है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अच्छे से करेंगे। साथ में पार्षद को भी कूड़े पर कार्रवाई का अधिकार है, लेकिन कुछ ही वार्डों में स्वच्छता कमेटी बनी है और इसे लेकर पार्षद भी गंभीर नहीं दिख रहे। इस कारण खड्डों और नालियों में गंदगी पसर रही है। उल्लंघन कर्ता भी बच रहे हैं।
कोट्स
निगम के सफाई निरीक्षक सतीश गुलेरिया ने बताया कि पिछली बार से इस बार सफाई व्यवस्था में 95 फीसदी सुधार हुआ है। 5 फीसदी कई लोग इधर-उधर कूड़ा ठिकाने लगा रहे हैं। निगम क्षेत्र में आते रास्तों में झाड़ियों की भी सफाई करवाई गई है।