जोगिंद्रनगर वन मंडल में बंद पड़ा विक्रय केंद्र
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जाइका प्रोजेक्ट के तहत आत्मनिर्भर बन रही महिलाओं को उनके निर्मित उत्पादों को बेचने के लिए बाजार नहीं मिल रहा है। जोगिंद्रनगर में हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन और आजीविका सुधार परियोजना के तहत स्थापित विक्रय केंद्र में ताला लटकने से उत्पाद बेचने में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वन मंडल की कवायद को झटका लगा है।
वन मंडल जोगिंद्रनगर के अधीन वन परिक्षेत्र जोगिंद्रनगर, लडभड़ोल, उरला, धर्मपुर, कमलाह और टिक्कन में जाइका प्रोजेक्ट के तहत करीब 800 महिलाओं को रोजगार मिला है। स्वयं सहायता समूह का गठन कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है। कटिंग, टेलरिंग के अलावा हल्दी, अचार, मशरूम उत्पादन के साथ टोर के पतलों से भी महिलाएं आजीविका कमा रही हैं।
घर की साज सजावट और आकर्षक परिधान तैयार कर आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए जाइका विभाग ने वानिकी परियोजना को लागू कर रखा है। लगभग 66 स्वयं सहायता समूह की 500 से अधिक महिलाओं की ओर से तैयार उत्पादों को उचित दाम दिलाने के लिए बीते साल दिसंबर में अतिरिक्त प्रधान एवं अरण्यपाल हिमाचल प्रदेश एवं मुख्य परियोजना निदेशक ने जोगिंद्रनगर में एक विक्रय केंद्र खोला था। यह बीते कई माह से बंद पड़ा हुआ है। ऐसे में महिलाओं को व्यवसायिक मेलों में ही अपने उत्पादों की बिक्री करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उधर, वन मंडलाधिकारी जोगिंद्रनगर कमल भारती ने बताया कि महिलाओं की ओर से तैयार उत्पादों के लिए जल्द स्थायी स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा।