जोगिंद्रनगर (मंडी)। आखिरकार तीन महीने के बाद रेलवे स्टेशन जोगिंद्रनगर में रेलगाड़ी पहुंच गई। सुबह 8ः30 बजे रेलगाड़ी बैजनाथ-पपरोला से चली और 9ः30 बजे जोगिंद्रनगर पहुंची। लगभग तीन माह बाद रेल सेवा के शुरू होने से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर छा गई, लेकिन जब उन्हें पता चला कि यह रेल मात्र जोगिंद्रनगर से पपरोला तक ही जाएगी। इससे कई व्यापारियों और लोगों के चेहरे मुरझा गए।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इसका किसी को कोई लाभ नहीं मिलने वाला जबकि मालगाड़ी तो अस्सी के दशक में ही बंद कर दी थी। शुक्रवार को पहली रेलगाड़ी बैजनाथ पपरोला से सुबह 8ः00 बजे चली और सुबह 09:35 बजे जोगिंद्रनगर पहुंची। वापिसी में 10:30 बजे चलकर दोपहर 12ः00 बजे बैजनाथ-पपरोला पहुंची।
दूसरी रेलगाड़ी बैजनाथ-पपरोला से दोपहर 1ः00 बजे चली और 2:35 बजे जोगिंद्रनगर पहुंची। हालांकि पहले दिन बड़ी कम संख्या में लोगों ने रेलगाड़ी में सफर किया। बता दें कि इससे पहले पांच जून को जोगिंद्रनगर पहुंची थी। इसके बाद बरसात में कई रेलवे लाइन पर मलबा आदि आने के कारण इसे बंद कर दिया था। इससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
जब से रेल अपने गंतव्य तक नहीं जा रही है, तब व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। पहले पठानकोट से सामान मंगवा लेते थे और किराया भी कम पड़ता था। मगर अब टांसपोर्ट के माध्यम से सामान मंगवाना महंगा पड़ रहा है।
-संजीव कुमार, व्यापारी, जोगिंद्रनगर
पहले देश के अन्य हिस्सों तक जाने के लिए जोगिंद्रनगर-पठानकोट रेल सेवा अच्छी और किफायती थी। मगर इसके बंद होने से आने-जाने वालों के साथ ही सरहदों पर तैनात फौजी भाइयों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
-सोनू सकलानी, व्यापारी
हमारा रेलवे से मोह भंग हो चुका है। यह दिन-प्रति दिन सिमटती जा रही है। अब तो इसका उपयोग लोगों के लिए न के बराबर रह गया है। जबकि सरकार को चाहिए था कि वे इस रेल का उद्दार कर इस सभी की सुविधा के लिए चालू करती।
- भूपेंद्र कुमार, स्थानीय व्यापारी
मैं एक बार ट्रेन से पठानकोट गया था। कांगड़ा वैली, नदियों का आनंद लिया, लेकिन अब यह सफर 22 किमी तक ही सिमट कर रह गया। सरकार इसे हेरिटेज घोषित कर और पर्यटन को बढ़ावा देकर युवाओं को रोजगार से साधन उपलब्ध करवाए।
-शुभम नचवाल, व्यापारी
शुभम नचयाल, व्यापारी जोगिंद्रनगर। संवाद
शुभम नचयाल, व्यापारी जोगिंद्रनगर। संवाद
शुभम नचयाल, व्यापारी जोगिंद्रनगर। संवाद
शुभम नचयाल, व्यापारी जोगिंद्रनगर। संवाद