जोगिंद्रनगर (मंडी)। कहते हैं हुनर किसी भी आयु वर्ग का मोहताज नहीं होता, अगर कुछ करने का जज्बा है तो आप हर क्षेत्र में अपनी सफलता की उड़ान भर सकते हैं। ऐसी ही सफलता की कहानी जोगिंद्रनगर की रागिनी ने लिखी है।
महज नौ साल की आयु में संगीत को अपना हुनर बनाकर रागिनी ने देशभर में 100 से अधिक लाइव शो अब तक 17 साल की आयु में पूरे कर लिए हैं। हिमाचल, पंजाब और उत्तर भारत के राज्यों में रागिनी की सुरीली आवाज का डंका बजा है। वह आमदनी भी अपनी सुरीली आवाज के दम पर जुटा रही हैं और परिवार को भी संबल देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि आज की बेटियां धरती से आसमान तक अपने हुनर का परचम लहरा रही हैं।
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पिता ने लाडली बेटी को संगीत में अध्यापक बनकर तराशा। जोगिंद्रनगर की रागिनी को संगीत के क्षेत्र में परिपक्व करने के लिए पिता कुलविंद्र की सबसे अधिक अहम भूमिका रही है। उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाई के साथ संगीत के क्षेत्र में भी बकौल अध्यापक बनकर तराशा। रागिनी हिमाचल की आवाज और टैलेंट वर्ल्ड शो में भी पुरस्कार जीत चुकी हैं। रागिनी की मां मंजू अपनी बेटी की सफलता पर बेहद उत्साहित हैं।
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