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Mandi News: सर्दियों से बचाते हैं पहाड़ी व्यंजन

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थुनाग (मंडी)। पहाड़ों में सर्दी से बचने के लिए पारंपरिक व्यंजन कारगर साबित होते हैं। सराज क्षेत्र के लोग सिड्डू, कुंगश, बेहुड़ी और खिचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का सर्दियों में खूब लुत्फ उठाते हैं। प्राकृतिक गुणों से भरपूर ये व्यंजन ग्रामीणों को निरोग रखने के साथ सर्दी से राहत देते हैं। थुनाग के देजी गांव की द्रोमती ने बताया कि पंद्रह पौष की रात को शून्य तक तापमान रहता है। इस दिन सर्दी से बचने के लिए सभी घरों में आलू, अखरोट गिरी और उड़द दाल के सिड्डू बनाए जाते हैं। रविवार को भी घाटी के सभी घरों में सिड्डू बना कर देशी घी के साथ इनका सेवन किया गया। जंजैहली की विद्या देवी का कहना है कि सिड्डू सर्दी के मौसम में ही खाया जाने वाला व्यंजन है। इस मौसम बिच्छू बूटी की सब्जी सबसे ज्यादा खाई जाती है। इससे रक्त भी साफ होता है। इसका सेवन करने से सर्दी नहीं लगती।
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खौली की मीना देवी ने बताया कि बिच्छू बूटी की सब्जी शरीर को गर्म रखती है। पेट की समस्या को दूर करती है और हड्डियों को मजबूत करती है। इसके सेवन से स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध ज्यादा बनता है। बिच्छू बूटी में विटामिन सी और आयरन की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। सराज घाटी में मकर संक्रांति को ऋतु परिवर्तन के रूप में देखा जाता है। इस दिन चावल के साथ उड़द, राजमा, कुलथ की खिचड़ी बनाई जाती है। संवाद
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