सरकाघाट में विभिन्न संगठनों ने जाहिर की नाराजगी, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
संविधान संशोधन विधेयक लाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सरकाघाट (मंडी)। उच्च न्यायालय की ओर से 1 अगस्त को दिए गए निर्णय में अनुसूचित जातियों, जनजातियों के आरक्षण में उप-वर्गीकरण और क्रीमीलेयर की अवधारणा लागू करने के खिलाफ विभिन्न संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर विरोध दर्ज किया।
इसके बाद इन संगठनों और कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम सरकाघाट स्वाति डोगरा से मिला और उनके माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में मांग की गई है कि इस निर्णय के खिलाफ संविधान संशोधन विधेयक लाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। इस विधेयक को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की भी मांग की गई, ताकि पूना पैक्ट, भारतीय संविधान और देश के 40 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति और जनजातीय लोगों के अस्तित्व और प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखा जा सके। प्रतिनिधिमंडल में मौजूद अमी चंद, रणजीत सिंह, प्रकाश चंद दरोच, दीप कुमार संधु, रतन चंद, प्रेम सिंह, हरिदास प्रजापति, राजेंद्र सूर्यवंशी, संजय कुमार, ब्रजलाल सूर्यवंशी, भाग सिंह, नंदलाल प्रेमी, ज्ञान चंद, देवी चंद, ओम चंद आदि का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 341 और 342 के खिलाफ है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।