जलशक्ति विभाग ने 55 प्रधानों को उपलब्ध करवाई किट
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की शुद्धता की जांच अब पंचायत प्रतिनिधि अपने स्तर पर भी कर सकेंगे। इसके लिए जल शक्ति विभाग ने विकास खंड चौंतड़ा और द्रंग के 55 पंचायतों के प्रधानों को वाटर फील्ड टेस्ट किट उपलब्ध करवाई है। दूषित पानी के सेवन से पीलिया, हैजा और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने की आशंका को ध्यान में रखते हुए जलशक्ति विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों और सचिवों को पानी की गुणवत्ता के मापदंड बताए हैं। ऐसे में अगर कहीं भी दूषित पानी लोगों तक पहुंचता है तो पंचायत प्रतिनिधि इसकी गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाएंगे।
गर्मी के मौसम में दूषित पानी के सेवन से लोगों के बीमार होने की आशंका को समाप्त करने के मकसद से पंचायत प्रतिनिधियों को वाटर फील्ड टेस्ट किट उपलब्ध करवाई गई हैं। इससे प्रतिनिधि पानी की गुणवत्ता की जांच करेंगे। अगर पानी की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई तो जलशक्ति विभाग अपने स्तर पर भी त्वरित कार्रवाई करेगा। प्राकृतिक जल स्रोतों और उठाऊ पेयजल योजनाओं के अलावा हैंडपंपों से निकलने वाले पानी की जांच भी पंचायत प्रतिनिधि जल शक्ति विभाग की ओर से उपलब्ध करवाई गई फील्ड वाटर टेस्ट किट से जांच सकेंगे।
जलशक्ति विभाग जोगिंद्रनगर के सहायक अभियंता प्रकाश चंद ने बताया कि 6.5-8.5 स्वच्छ पेयजल की वांछित और स्वीकार्य मात्रा रहेगा। इससे अधिक या कम रिपोर्ट आने पर पानी पीने योग्य नहीं माना जाएगा। बताया कि जल संरक्षण और भूजल को रिचार्ज करने के प्रयास भी जल शक्ति विभाग की ओर से किए जा रहे हैं। बारिश के दौरान मकान की छत से वर्षा का जल एकत्रित करने को लेकर भी पेयजल उपभोक्ताओं को जागरूक किया जा रहा है।
जलशक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि पानी की अमलीयता, फ्लोराइड व लौह तत्व की मात्रा की जांच के पैरामीटर भी उपभोक्ताओं को बताए जा रहे हैं। विकास खंड चौंतड़ा व द्रंग की हर पंचायत के प्रतिनिधियों को पानी की शुद्धता जांच के लिए फील्ड वाटर टेस्ट किट और केमिकल भी उपलब्ध करवा रखे हैं।